रांची से राणा प्रताप की रिपोर्ट
Jharkhand High Court News: लातेहार में वाहन चेकिंग के दौरान मोटरसाइकिल सवार को बेरहमी से पिटाई करने के मामले में आरोपी सहायक पुलिस उप निरीक्षक (एएसआई) नागेश्वर महतो को झारखंड हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिल गई है. हाईकोर्ट के जस्टिस अनिल कुमार चौधरी की अदालत ने उनकी क्रिमिनल क्वैश्चिंग याचिका पर सुनवाई करते हुए दोनों पक्षों को सुनने के बाद इस मामले में लिए गए संज्ञान आदेश सहित सारी आपराधिक कार्यवाही को निरस्त कर दिया. इस मामले में पीड़ित के शिकायतवाद पर सुनवाई के बाद मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी (सीजेएम) लातेहार ने आरोपी सहायक पुलिस उप निरीक्षक (एएसआई) के खिलाफ दंडनीय अपराध का संज्ञान लिया था, जिसे आरोपी ने चुनौती दी थी.
हाईकोर्ट ने निचली अदालत के फैसले को बताया अवैध
अदालत ने कहा कि उसे यह मानने में कोई संकोच नहीं है कि सीजेएम लातेहार ने दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 197 के तहत अभियोजन की मंजूरी के बिना भारतीय दंड संहिता की धारा 323 के तहत दंडनीय अपराध का संज्ञान लेकर गंभीर अवैधता की है. वैसी स्थिति में शिकायतवाद में दो अप्रैल 2024 को पारित आदेश सहित पूरी आपराधिक कार्यवाही कानून की दृष्टि में टिकने योग्य नहीं है. इसलिए इस कार्यवाही को निरस्त किया जाता है और याचिका को स्वीकृत किया जाता है.
अदालत में अधिवक्ता ने रखा पक्ष
इससे पहले मामले की सुनवाई के दौरान प्रार्थी की ओर से अधिवक्ता भवेश कुमार ने पक्ष रखा. उन्होंने अदालत को बताया कि सीजेएम की अदालत ने बिना अभियोजन स्वीकृति के ही संज्ञान लिया है, जो कानून की दृष्टि में टिकने योग्य नहीं है. किसी सरकारी अधिकारी के खिलाफ आपराधिक मुकदमा चलाने के पूर्व सरकार से स्वीकृति लेना कानूनी रूप से अनिवार्य है.
क्या था मामला
प्रार्थी और एएसआई नागेश्वर महतो के विरुद्ध आरोप यह था कि घटना के दिन प्रार्थी वाहन चेकिंग के उद्देश्य से घटनास्थल पर तैनात थे. शिकायतकर्ता, जो अपने मित्र की मोटरसाइकिल पर पीछे बैठा था, उसे शाम करीब 5:30 बजे रुकने का निर्देश दिया गया. शिकायतकर्ता रुक गया. प्रार्थी ने अचानक कॉन्स्टेबल को शिकायतकर्ता को पीटने का आदेश दिया, जिस पर कॉन्स्टेबल ने शिकायतकर्ता को डंडे से पीटा.
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इसके बाद प्रार्थी ने शिकायतकर्ता को मोटरसाइकिल से नीचे उतारने के लिए धक्का दिया और उसे अपने हाथों से पीटा. दूसरे पुलिसकर्मियों ने भी शिकायतकर्ता को हाथों और डंडों से पीटा. वे शिकायतकर्ता को थाने ले गये और वहां भी उसकी पिटाई की. पिटाई के कारण शिकायतकर्ता के शरीर के विभिन्न हिस्सों पर चोटें आयीं और उसकी सुनने की क्षमता कम हो गयी है. शिकायतकर्ता की जैकेट उतरवाकर भी उसकी पिटाई की गयी और उसे थाने की हाजत (लॉकअप) में बंद कर दिया गया. उसी दिन रात 10:30 बजे ही उसे छोड़ा गया. सीजेएम की अदालत ने शिकायतवाद में शिकायतकर्ता के बयान और जांच गवाहों के बयानों के आधार पर उक्त अपराध का संज्ञान लिया था.
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