Shravani Mela 2020 : देवघर में श्रावणी मेला के आयोजन को लेकर हाई कोर्ट ने उपायुक्त को नोटिस जारी किया, अगली सुनवाई 30 जून को

Shravani Mela 2020 : jharkhand High Court issues notice to Deputy Commissioner regarding celebration of Shravani Mela in Deoghar : झारखंड के देवघर में श्रावणी मेला के आयोजन को लेकर मंदिर प्रबंधन समिति के अध्यक्ष सह देवघर के उपायुक्त को झारखंड हाईकोर्ट ने नोटिस जारी किया गया है. ऐतिहासिक श्रावणी मेला के आयोजन को लेकर कोर्ट में सुनवाई के दौरान उपायुक्त को यह निर्देश दिया गया है कि वे राज्य सरकार से निर्देश प्राप्त कर इस संबंध में कोर्ट को अवगत करायें.

रांची : झारखंड के देवघर में श्रावणी मेला के आयोजन को लेकर मंदिर प्रबंधन समिति के अध्यक्ष सह देवघर के उपायुक्त को झारखंड हाईकोर्ट ने नोटिस जारी किया गया है. ऐतिहासिक श्रावणी मेला के आयोजन को लेकर कोर्ट में सुनवाई के दौरान उपायुक्त को यह निर्देश दिया गया है कि वे राज्य सरकार से निर्देश प्राप्त कर इस संबंध में कोर्ट को अवगत करायें.

कोर्ट ने इस मामले में बिहार सरकार को भी प्रतिवादी बनाने को कहा है. मामले की अगली सुनवाई 30 जून को होगी. गौरतलब है कि गोड्डा के सांसद निशिकांत दुबे ने श्रावणी मेला को लेकर जनहित याचिका दायर की है. झारखंड के देवघर में स्थित बाबा बैद्यनाथ का मंदिर 12 ज्योतिर्लिंग में से एक है.

जनहित याचिका में यह मांग की गयी है कि सावन के पवित्र माह में बाबा बैद्यनाथ के मंदिर में भक्तों को पूजा करने की इजाजत दी जाये. गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने पुरी की रथयात्रा के आयोजन को मंजूरी दे दी थी, जिसके बाद देवघर में पूजा के आयोजन को लेकर याचिका दाखिल की गयी है.

प्रार्थी की ओर से अधिवक्ता रवि प्रकाश मिश्र ने बताया कि मामले में केंद्र सरकार, राज्य सरकार, पंडा धर्म रक्षिणी बोर्ड, देवघर मंदिर न्यास बोर्ड को प्रतिवादी बनाया गया है. याचिका में कहा गया है कोरोना वायरस (कोविड-19) महामारी को देखते हुए प्रोटोकॉल का पालन करते हुए श्रावणी मेला का आयोजन किया जाना चाहिए. प्रार्थी का कहना है कि श्रावणी मेला से करोड़ों लोगों की धार्मिक आस्था जुड़ी हुई है, इसलिए नियमों के अनुसार श्रावणी मेले के आयोजन को अनुमति दी जाये.

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

Author: Rajneesh Anand

Published by: Prabhat Khabar

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.

Read More

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >