ई-वेस्ट पर झारखंड हाइकोर्ट सख्त: राज्य सरकार से मांगा जवाब, 2 जुलाई को अगली सुनवाई

Jharkhand High Court: झारखंड हाइकोर्ट ने राज्य में इलेक्ट्रॉनिक कचरे (E-Waste) के निष्पादन को लेकर दायर PIL पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार और प्रदूषण बोर्ड से जवाब मांगा है. अदालत ने पूछा है कि ई-वेस्ट के लिए SOP बनी है या नहीं.

रांची से राणा प्रताप की रिपोर्ट

Jharkhand High Court, रांची : झारखंड हाईकोर्ट ने राज्य में इलेक्ट्रॉनिक कचरे (E-Waste) के उचित निष्पादन को लेकर दायर एक जनहित याचिका (PIL) पर महत्वपूर्ण सुनवाई की. चीफ जस्टिस एमएस सोनक और जस्टिस राजेश शंकर की खंडपीठ ने इस मामले को पर्यावरण और जनस्वास्थ्य के लिहाज से बेहद गंभीर बताया है. अदालत ने राज्य सरकार और झारखंड राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (JSPCB) को नोटिस जारी कर इस संबंध में विस्तृत जवाब दाखिल करने का कड़ा निर्देश दिया है.

हाइकोर्ट ने पूछा- ई-वेस्ट मैनेजमेंट के लिए क्या हैं तैयारी?

सुनवाई के दौरान खंडपीठ ने प्रतिवादियों (राज्य सरकार और प्रदूषण बोर्ड) से मुख्य रूप से यह जानना चाहा है कि झारखंड में इलेक्ट्रॉनिक कचरे के सुरक्षित और उचित निष्पादन को लेकर अब तक कोई स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) बनाई गई है या नहीं. अदालत ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए अगली सुनवाई के लिए 2 जुलाई 2026 की तिथि निर्धारित की है.

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केंद्र की नियमावली के बावजूद राज्य में नहीं बनी SOP

इससे पहले, प्रार्थी की ओर से पक्ष रखते हुए अधिवक्ता शैलेश पोद्दार ने खंडपीठ को बताया कि इलेक्ट्रॉनिक कचरे के सुरक्षित निष्पादन के लिए केंद्र सरकार ने पहले ही स्पष्ट नियमावली बना चुकी है. इस नियमावली के तहत राज्य सरकार की यह जिम्मेदारी है कि वह अपने स्तर पर एक प्रभावी एसओपी (SOP) तैयार करे, ताकि ई-वेस्ट का सही तरीके से निस्तारण हो सके, लेकिन राज्य में अब तक इस दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं.

मानव, पशु और पर्यावरण के लिए बड़ा खतरा है ई-वेस्ट

उल्लेखनीय है कि यह जनहित याचिका प्रार्थी शशि सागर वर्मा द्वारा दायर की गई है. याचिका में इस बात पर गहरी चिंता जताई गई है कि वर्तमान में इलेक्ट्रॉनिक कचरा (जैसे पुराने मोबाइल, कंप्यूटर, बैटरी आदि) आम घरेलू कचरे के साथ ही मिल जाता है. यह लापरवाही न केवल पर्यावरण को भारी नुकसान पहुंचा रही है, बल्कि मानव, पशु-पक्षियों और जमीन के स्वास्थ्य पर भी बेहद घातक असर डाल रही है. झारखंड में पर्यावरण संतुलन बनाए रखने के लिए एक मजबूत ‘इलेक्ट्रॉनिक वेस्ट मैनेजमेंट’ सिस्टम का होना बेहद जरूरी है.

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Published by: Sameer Oraon

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