भूमि सर्वे मामले में हाईकोर्ट में सरकार का जवाब, नई टेक्नोलॉजी से सर्वे तेज करने की तैयारी, बनी समिति

झारखंड में वर्षों से लंबित भूमि सर्वे को लेकर हाईकोर्ट में सुनवाई हुई. राज्य सरकार ने बताया कि आधुनिक तकनीक से सर्वे को तेज और सटीक बनाया जाएगा. नई तकनीक के अध्ययन के लिए विशेषज्ञ समिति का गठन किया गया है.


रांची से राणा प्रताप की रिपोर्ट

Jharkhand High Court: झारखंड में वर्षों से लंबित भूमि सर्वे को लेकर दायर जनहित याचिका पर मंगलवार को झारखंड हाईकोर्ट में सुनवाई हुई. सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने अदालत को बताया कि भूमि सर्वे की प्रक्रिया को आधुनिक तकनीक के माध्यम से तेज और अधिक सटीक बनाया जाएगा. इसके लिए नई तकनीक के उपयोग और उसके क्रियान्वयन का अध्ययन करने हेतु एक विशेषज्ञ समिति का गठन किया गया है. यह समिति तीन महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपेगी. मामले की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने अगली सुनवाई के लिए 5 अगस्त की तिथि निर्धारित की है.

हाईकोर्ट ने शपथ पत्र का किया अवलोकन

चीफ जस्टिस एम.एस. सोनक और जस्टिस राजेश शंकर की खंडपीठ ने भूमि सर्वे को लेकर राजस्व, निबंधन एवं भूमि सुधार विभाग के सचिव द्वारा दायर शपथ पत्र का अवलोकन किया. सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि वर्तमान समय की जरूरतों को देखते हुए भूमि सर्वे में अत्याधुनिक तकनीक का उपयोग किया जाएगा, जिससे सर्वेक्षण कार्य अधिक पारदर्शी, सटीक और समयबद्ध तरीके से पूरा किया जा सके. राज्य सरकार ने अदालत को यह भी बताया कि इस उद्देश्य से गठित समिति अन्य राज्यों में अपनाई जा रही तकनीकों का अध्ययन करेगी और यह सुझाव देगी कि झारखंड में उन्हें किस प्रकार लागू किया जाए.

तीन महीने में समिति देगी रिपोर्ट

शपथ पत्र में कहा गया कि समिति तीन माह के भीतर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी. रिपोर्ट में यह बताया जाएगा कि दूसरे राज्यों में भूमि सर्वे के लिए कौन-कौन सी आधुनिक तकनीकों का उपयोग किया जा रहा है और झारखंड में उन्हें किस समय सीमा के भीतर लागू किया जा सकता है. सरकार का कहना है कि नई तकनीक अपनाने से सर्वे कार्य में गति आएगी, रिकॉर्ड अधिक सटीक होंगे और भविष्य में भूमि संबंधी विवादों को कम करने में भी मदद मिलेगी.

महाधिवक्ता ने अदालत से मांगा समय

सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से महाधिवक्ता रोहितश्य रॉय ने अदालत से अतिरिक्त समय देने का आग्रह किया. उन्होंने कहा कि भूमि सर्वे जैसे महत्वपूर्ण विषय पर विभागीय सचिव और संबंधित अधिकारियों के साथ विस्तृत चर्चा की जाएगी. उन्होंने अदालत को भरोसा दिलाया कि सरकार नई तकनीक के माध्यम से भूमि सर्वे कार्य को तेज गति से पूरा करने के लिए गंभीरता से काम कर रही है और समिति की रिपोर्ट मिलने के बाद आगे की कार्ययोजना तैयार की जाएगी.

याचिकाकर्ता ने सरकार की धीमी गति पर उठाए सवाल

याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता प्रत्युष शौनिक्य ने सरकार के दावों पर सवाल उठाते हुए कहा कि नई तकनीक सीखने के नाम पर सरकार पहले ही काफी समय गंवा चुकी है. उन्होंने अदालत को बताया कि झारखंड सरकार की एक टीम पहले ही बिहार, आंध्र प्रदेश और कर्नाटक जैसे राज्यों का दौरा कर वहां अपनाई जा रही भूमि सर्वे तकनीक का अध्ययन कर चुकी है और अपनी रिपोर्ट भी सरकार को सौंप चुकी है. इसके बावजूद अब एक नई समिति का गठन किया जाना यह दर्शाता है कि सरकार इस मामले में अपेक्षित गति से काम नहीं कर रही है. उन्होंने कहा कि लगातार देरी के कारण भूमि सर्वे का कार्य वर्षों से अधूरा पड़ा हुआ है.

1974-75 से अधूरा है भूमि सर्वे

जनहित याचिका दायर करने वाले गोकुल चंद ने अदालत से भूमि सर्वे का कार्य जल्द पूरा कराने की मांग की है. याचिका में कहा गया है कि झारखंड क्षेत्र में अंतिम व्यापक भूमि सर्वे वर्ष 1932 में हुआ था. इसके बाद वर्ष 1974-75 में दोबारा सर्वेक्षण की प्रक्रिया शुरू की गई, लेकिन पांच दशक बीत जाने के बाद भी यह कार्य पूरा नहीं हो सका. याचिकाकर्ता का कहना है कि अधूरे सर्वे के कारण भूमि के मालिकाना हक, सीमांकन और भूमि की प्रकृति को लेकर लगातार विवाद सामने आते हैं. समय पर सर्वे पूरा होने से भूमि रिकॉर्ड अद्यतन होंगे और फर्जीवाड़ा तथा हेराफेरी की संभावनाएं भी कम होंगी.

आधुनिक तकनीक से रिकॉर्ड होंगे अपडेट

राज्य सरकार ने पहले भी अदालत को जानकारी दी थी कि भूमि सर्वे में तेजी लाने के लिए तीन अलग-अलग टीमों को बिहार, आंध्र प्रदेश और कर्नाटक भेजा गया था, ताकि वहां उपयोग हो रही आधुनिक तकनीकों का अध्ययन किया जा सके. सरकार का कहना है कि इन तकनीकों को झारखंड की जरूरतों के अनुरूप अपनाकर सर्वे प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाया जाएगा. सरकार ने यह भी बताया कि राज्य के लातेहार और लोहरदगा जिलों में भूमि सर्वे का कार्य पूरा हो चुका है, जबकि अन्य जिलों में इसे चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ाया जाएगा.

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5 अगस्त को होगी अगली सुनवाई

अब इस मामले में सभी की निगाहें 5 अगस्त को होने वाली अगली सुनवाई पर टिकी हैं. अदालत सरकार की प्रगति रिपोर्ट और समिति के गठन के बाद उठाए गए कदमों की समीक्षा करेगी. यदि आधुनिक तकनीक के सहारे सर्वे कार्य को गति मिलती है, तो वर्षों से लंबित भूमि रिकॉर्ड के अद्यतन होने और भूमि विवादों में कमी आने की उम्मीद बढ़ेगी.

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लेखक के बारे में

Published by: Kumarvishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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