साइबर अपराध के बढ़ते मामले पर झारखंड हाईकोर्ट ने केंद्र को दिया ये निर्देश, 16 फरवरी को फिर होगी सुनवाई

वही, स्टेट लेवल बैंकर्स कमेटी की ओर से शपथ पत्र दायर कर बताया गया कि साइबर फ्रॉड के शिकार लोगों का पैसा दिलाने पर वह स्वयं कोई निर्णय नहीं ले सकता है.

रांची : झारखंड हाईकोर्ट ने राज्य में बढ़ते साइबर ठगी के मामलों को लेकर स्वत: संज्ञान से दर्ज याचिका पर सुनवाई की. एक्टिंग चीफ जस्टिस एस चंद्रशेखर व जस्टिस अनुभा रावत चाैधरी की खंडपीठ ने सुनवाई के दाैरान राज्य सरकार व केंद्र सरकार का पक्ष सुना. खंडपीठ ने केंद्र सरकार को साइबर फ्रॉड के शिकार लोगों के पैसे की वापसी के संबंध में स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसिजर (एसओपी) प्रस्तुत करने को कहा. मामले की अगली सुनवाई 16 फरवरी को होगी. इससे पूर्व इंडियन साइबर क्राइम को-ऑर्डिनेशन सेंटर के एसीपी जितेंद्र सिंह की ओर बताया गया कि साइबर फ्रॉड के शिकार लोगों के पैसे वापसी को लेकर चर्चा चल रही है. अगले सप्ताह में केंद्र सरकार के स्तर पर एक बैठक होनी है, इसके बाद एसओपी तैयार कर लिया जायेगा.

वही, स्टेट लेवल बैंकर्स कमेटी की ओर से शपथ पत्र दायर कर बताया गया कि साइबर फ्रॉड के शिकार लोगों का पैसा दिलाने पर वह स्वयं कोई निर्णय नहीं ले सकता है. वह जो भी निर्णय लेता है, वह रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआइ) के दिशा-निर्देश के आलोक में ही लेता है. राज्य सरकार की ओर से महाधिवक्ता राजीव रंजन व अधिवक्ता पीयूष चित्रेश ने बताया कि केंद्र सरकार के स्तर पर साइबर फ्रॉड के शिकार लोगों के पैसे वापसी को लेकर 20 जनवरी को एक वर्चुअल बैठक हुई थी.

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इसमें देश के विभिन्न राज्यों के संबंधित अथॉरिटी के अधिकारी, इंडियन साइबर क्राइम को-ऑर्डिनेशन सेंटर, इंडियन बैंकिंग एसोसिएशन के प्रतिनिधि, स्टेट लेवल बैंकिंग एसोसिएशन के प्रतिनिधि, सीआइडी डीजी अनुराग गुप्ता, मामले की एमिकस क्यूरी सौम्या एस पांडेय भी शामिल हुई थी. एसओपी बना कर केंद्र को भेजा गया है. उल्लेखनीय है कि सीआइडी डीजी अनुराग गुप्ता द्वारा साइबर क्राइम के पीड़ित लोगों के पैसा वापसी को लेकर लिखे गये एक पत्र को हाइकोर्ट ने गंभीरता से लेते हुए उसे याचिका में तब्दील कर दिया था.

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