Jharkhand High Court: झारखंड हाईकोर्ट ने राज्य के पुलिस थानों में सीसीटीवी कैमरे नहीं लगाए जाने के मामले में राज्य सरकार पर कड़ी नाराजगी जताई है. चीफ जस्टिस एमएस सोनक और जस्टिस राजेश शंकर की खंडपीठ ने स्वत: संज्ञान से दर्ज जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए सरकार से पूछा कि अदालत के पहले दिए गए निर्देशों का पालन आखिर क्यों नहीं किया गया. अदालत ने यह भी सवाल उठाया कि आदेश के अनुपालन में लापरवाही बरतने वालों के खिलाफ अब तक अवमानना की कार्रवाई क्यों नहीं शुरू की गई.
डीजीपी को शपथ पत्र दाखिल करने का निर्देश
सुनवाई के दौरान खंडपीठ ने राज्य के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) तदाशा मिश्रा को इस मामले में शपथ पत्र दाखिल करने का निर्देश दिया. अदालत ने स्पष्ट किया कि चार सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल कर यह बताया जाए कि राज्य के सभी पुलिस थानों में सीसीटीवी कैमरे लगाने को लेकर अब तक क्या कदम उठाए गए हैं और पहले के निर्देशों का पालन क्यों नहीं हुआ.
अदालत ने अनुपालन पर जताई गंभीर चिंता
खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान इस बात पर गंभीर चिंता व्यक्त की कि पुलिस थानों में सीसीटीवी कैमरे लगाने संबंधी निर्देशों का अपेक्षित स्तर पर पालन नहीं किया गया. अदालत ने कहा कि न्यायालय के आदेशों का पालन सुनिश्चित करना सरकार की जिम्मेदारी है. यदि निर्देशों के बावजूद कार्रवाई नहीं हुई है, तो इसके लिए जवाबदेही तय होना भी जरूरी है. अदालत के सवालों से साफ संकेत मिला कि वह केवल औपचारिक जवाब से संतुष्ट नहीं होगी, बल्कि यह जानना चाहती है कि राज्य सरकार ने निर्देशों के अनुपालन के लिए वास्तविक स्तर पर क्या प्रयास किए और यदि कहीं कमी रही तो उसके लिए जिम्मेदार कौन है.
तरुण कुमार महतो मामले से जुड़ी है याचिका
यह स्वत: संज्ञान जनहित याचिका 2024 में विधानसभा प्रत्याशी तरुण कुमार महतो से जुड़े मामले से संबंधित है. आरोप है कि ईचागढ़ पुलिस ने 19 नवंबर 2025 को उन्हें उठाया था और हिरासत में उनके साथ जमकर पिटाई की गई थी. इस घटना के बाद उनकी पत्नी ने पूरे मामले को लेकर झारखंड हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस को पत्र लिखा था. पत्नी की ओर से भेजी गई इसी चिट्ठी को अदालत ने गंभीरता से लेते हुए स्वत: संज्ञान को जनहित याचिका के रूप में दर्ज किया था. उसी याचिका की सुनवाई के दौरान पुलिस थानों में सीसीटीवी कैमरों की व्यवस्था और अदालत के पूर्व निर्देशों के पालन का मुद्दा प्रमुख रूप से सामने आया.
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चार सप्ताह में देना होगा जवाब
अब हाईकोर्ट ने डीजीपी को चार सप्ताह के भीतर शपथ पत्र दाखिल करने का निर्देश दिया है. अदालत यह जानना चाहती है कि राज्य के विभिन्न पुलिस थानों में सीसीटीवी कैमरे लगाने की वर्तमान स्थिति क्या है, पहले दिए गए निर्देशों के अनुपालन में क्या कार्रवाई हुई और यदि आदेशों का पालन नहीं हुआ तो उसके लिए कौन जिम्मेदार है?
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