रांची से राणा प्रताप की रिपोर्ट
Jamshedpur News: झारखंड हाईकोर्ट में जमशेदपुर अधिसूचित क्षेत्र समिति (जेएनएसी) क्षेत्र में नक्शा विचलन और अवैध निर्माण से जुड़े मामले की सुनवाई फिलहाल टल गई है. सोमवार को हुई सुनवाई के दौरान कोर्ट ने मामले को चार सप्ताह के लिए स्थगित कर दिया. इस फैसले के बाद फिलहाल जेएनएसी की कार्रवाई पर अनिश्चितता बनी हुई है.
हाईकोर्ट की बेंच ने सुनी मामले की दलील
मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस एमएस सोनक और जस्टिस राजेश शंकर की खंडपीठ में हुई. सुनवाई के दौरान अदालत को बताया गया कि इस मामले में सुप्रीम कोर्ट पहले ही जेएनएसी की कार्रवाई पर रोक लगा चुका है और चार सप्ताह का समय दिया गया था. सोमवार को इस मामले में विस्तृत सुनवाई होनी थी, लेकिन परिस्थितियों को देखते हुए अदालत ने सुनवाई को चार सप्ताह के लिए टाल दिया. इस फैसले के बाद फिलहाल संबंधित भवनों पर किसी प्रकार की तोड़फोड़ की कार्रवाई नहीं हो सकेगी और मामले की अगली सुनवाई अब निर्धारित समय के बाद होगी.
जेएनएसी ने दायर किया अनुपालन एफिडेविट
सुनवाई के दौरान जेएनएसी की ओर से अधिवक्ता कृष्णकांत कुमार ने अदालत में अनुपालन एफिडेविट दायर किया. उन्होंने अदालत को बताया कि हाईकोर्ट के पूर्व आदेश के आलोक में 24 प्रतिवादियों को नोटिस जारी किया गया था. इन नोटिसों के बाद संबंधित भवनों के विवादित हिस्सों को ध्वस्त करने की कार्रवाई की जानी थी. हालांकि, इस बीच सुप्रीम कोर्ट ने नोटिस पर रोक लगा दी. इसके चलते जेएनएसी को अपनी कार्रवाई रोकनी पड़ी और मामला फिलहाल कानूनी प्रक्रिया में अटका हुआ है.
15 जनवरी को हाईकोर्ट ने दिया था सख्त आदेश
इससे पहले 15 जनवरी को झारखंड हाईकोर्ट ने इस मामले में सख्त रुख अपनाया था. अदालत ने जेएनएसी क्षेत्र के 24 अवैध भवनों के विवादित हिस्सों को एक महीने के भीतर ध्वस्त करने का स्पष्ट और लिखित आदेश दिया था. अदालत ने अपने आदेश में कहा था कि बिल्डिंग बायलॉज के उल्लंघन के मामलों में किसी भी तरह की ढिलाई या शिथिलता बर्दाश्त नहीं की जाएगी. कोर्ट ने प्रशासन को निर्देश दिया था कि नियमों का पालन सुनिश्चित किया जाए और अवैध निर्माण के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए.
21 भवन मालिकों को सुप्रीम कोर्ट से राहत
इस पूरे मामले में कुल 24 भवन मालिकों के नाम सामने आए थे. इनमें से 21 भवन मालिकों को सुप्रीम कोर्ट से स्टे मिल चुका है. इसके अलावा, एक भवन मालिक को झारखंड हाईकोर्ट से राहत प्राप्त हुई है. हालांकि, दो भवन मालिक ऐसे हैं जिन्होंने अब तक न तो हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है और न ही सुप्रीम कोर्ट में अपील की है. इन दोनों भवन मालिकों के नाम साकची के एसके एकथ और सत्यनारायण मारवाड़ी बताए जा रहे हैं.
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दो भवन मालिकों पर कार्रवाई का खतरा बरकरार
जिन दो भवन मालिकों ने अब तक किसी भी अदालत में अपील नहीं की है, उन पर कार्रवाई का खतरा अभी भी बना हुआ है. यदि अदालत की ओर से कोई नई राहत नहीं मिलती है, तो प्रशासन उनके भवनों के विवादित हिस्सों पर कार्रवाई कर सकता है. फिलहाल, हाईकोर्ट की अगली सुनवाई तक पूरे मामले पर सबकी नजर बनी हुई है. जमशेदपुर में अवैध निर्माण को लेकर यह मामला लंबे समय से चर्चा में है और आने वाले दिनों में अदालत का फैसला कई भवन मालिकों के लिए अहम साबित हो सकता है.
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