झारखंड में क्रिटिकल मिनरल भंडार की खोज करेंगी अमेरिकी कंपनियां, सरकार ने की पहल

Ranchi: झारखंड सरकार ने राज्य में क्रिटिकल मिनरल भंडार की खोज के लिए नई पहल शुरू की है. प्रस्तावित योजना के तहत अमेरिकी कंपनियां आधुनिक तकनीकों की मदद से खनिज अन्वेषण में सहयोग कर सकती हैं, जिससे निवेश और औद्योगिक विकास को बढ़ावा मिलने की संभावना है. पूरी रिपोर्ट नीचे पढ़ें...

सुनील चौधरी
Ranchi: झारखंड में परंपरागत खनिजों के अलावा क्रिटिकल मिनरल्स की खोज, खनन, प्रसंस्करण एवं तकनीकी सहयोग के क्षेत्र में अमेरिकी कंपनियों द्वारा रुचि दिखाई गयी है. इस संबंध में मंगलवार को मुख्य सचिव अविनाश कुमार एवं अमेरिकी काउंसलेट जेनरल कैली जाइल डियाज के नेतृत्व में आये प्रतिनिधिमंडल के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गयी. बैठक के दौरान झारखंड में खनिज क्षेत्र में उपलब्ध व्यापक संभावनाओं पर चर्चा की गयी. प्रतिनिधिमंडल को अवगत कराया गया कि राज्य में कोयला, लौह अयस्क, तांबा, बॉक्साइट, सोना, लाइम स्टोन जैसे परंपरागत खनिजों के विशाल भंडार उपलब्ध हैं और इनके खनन एवं प्रसंस्करण के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की गई है.

विश्व की अग्रणी कंपनियों से संपर्क कर रही है सरकार

बैठक के दौरान अमेरिकी काउंसलेट जेनरल के माध्यम से अमेरिकी कंपनियों को झारखंड में खनन, खनिज अन्वेषण एवं उन्नत तकनीक आधारित गतिविधियों से जुड़ने के लिए आमंत्रित किया गया. यह भी बताया गया कि इस क्षेत्र में उन्नत तकनीक के साथ कार्य कर रही विश्व की विभिन्न अग्रणी कंपनियों के साथ राज्य सरकार द्वारा निरंतर संपर्क स्थापित किया जा रहा है तथा इस दिशा में उल्लेखनीय प्रगति भी हुई है. इच्छुक कंपनियों द्वारा खनिज ब्लॉक प्राप्त कर अत्याधुनिक तकनीकों के माध्यम से कार्य किये जाने की संभावनाओं पर भी चर्चा की गयी.

अमेरिकी माइनिंग कंपनियों के समूह ने सरकार से किया संपर्क

बैठक में यह जानकारी भी शेयर की गई कि अमेरिका की माइनिंग कंपनियों के समूह यूएसआईएसपीए द्वारा झारखंड सरकार के साथ संपर्क स्थापित किया गया है. समूह द्वारा खनिज ब्लॉकों की खुली नीलामी प्रक्रिया में भाग लेने की इच्छा व्यक्त की गयी है. विशेष रूप से दुर्लभ खनिजों की खोज, खनन एवं प्रसंस्करण गतिविधियों में रुचि प्रदर्शित की गई है.

बैठक में खान एवं भूतत्व विभाग के सचिव अरवा राजकमल, खान निदेशक राहुल कुमार सिन्हा समेत अन्य अधिकारी उपस्थित थे.

गिरिडीह-कोडरमा में लिथियम के भंडार

पूरी दुनिया में 24 रणनीतिक व क्रिटिकल मिनरल चिन्हित किये गये हैं. जिसमें 20 मिनरल झारखंड में ही उपलब्ध है. अमेरिका, चीन, समेत दुनिया के कई देश अभी क्रिटिकल मिनरल में साझेदारी चाहते हैं. झारखंड के गिरिडीह, कोडरमा जिलें में लिथियम के भंडार मिल चुके हैं. यह इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए महत्वपूर्ण खनिज माना जाता है.

पलामू–लातेहार है ग्रेफाइट बेल्ट

बैटरी उद्योग के लिए ग्रेफाइट भी आवश्यक होता है. झारखंड के पलामू व लातेहार ग्रेफाइट बेल्ट है. यह भारत के प्रमुख ग्रेफाइट क्षेत्रों में गिना जाता है.

लोहरदगा–गुमला बॉक्साइट क्षेत्र में भी क्रिटिकल मिनरल

लोहरदगा–गुमला बॉक्साइट क्षेत्र में भी क्रिटिकल मिनरल की पुष्टि हुई है. बॉक्साइट के साथ टाइटेनियम, गैलियम और वैनेडियम जैसे महत्वपूर्ण खनिजों पाये जाते हैं. इसकी पुष्टि भी हो चुकी है. यह भी भविष्य में बैटरी और उच्च-तकनीकी उद्योगों के लिए उपयोगी होगा.

पूर्वी व पश्चिमी सिंहभूम भी है क्रिटिकल मिनरल का जोन

झारखंड के पूर्वी व पश्चिमी सिंहभू भी क्रिटकिल मिनरल जोन में आता है. यहां तांबा के साथ-साथ निकेल, कोबाल्ट, सोना, आरइइ की संभावना ज्यादा है. पश्चिमी सिंहभूम में निकेल, कोबाल्ट, क्रोमाइट भी मिले हैं.

झारखंड में 20 क्रिटिकल मिनरल का भंडार

झारखंड में लिथियम, टाइटेनियम, वैनेडियम, सिल्वर, ग्रेफाइट, पोटाश, निकेल, आरईई, सेलेनियम, टेलुरियम, जिरकोनियम, मोलीबीडेनम, बेरिल, गेलियम, नियबियम, टांटुलम, पीजीई, टंगस्टेन, वेनेडियम व टिन के भंडार उपलब्ध हैं. साथ ही क्रिटिकल मिनरल की खोज लगातार चल रही है.

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Published by: AmleshNandan Sinha

अमलेश नंदन सिन्हा प्रभात खबर डिजिटल में वरिष्ठ पत्रकार के रूप में कार्यरत हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता में 20 से अधिक वर्षों का अनुभव है. रांची विश्वविद्यालय से पत्रकारिता की पढ़ाई करने के बाद से इन्होंने कई समाचार पत्रों के साथ काम किया. इन्होंने पत्रकारिता की शुरुआत रांची एक्सप्रेस से की, जो अपने समय में झारखंड के विश्वसनीय अखबारों में से एक था. एक दशक से ज्यादा समय से ये डिजिटल के लिए काम कर रहे हैं. झारखंड की खबरों के अलावा, समसामयिक विषयों के बारे में भी लिखने में रुचि रखते हैं. विज्ञान और आधुनिक चिकित्सा के बारे में देखना, पढ़ना और नई जानकारियां प्राप्त करना इन्हें पसंद है.

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