संतों की सुरक्षा को लेकर रांची में निकली विशाल मौन रैली, 650 से अधिक लोग हुए शामिल

Ranchi News: रांची में जैन समाज और विभिन्न सामाजिक संगठनों ने संतों की सुरक्षा को लेकर विशाल मौन रैली निकाली. आर्यिका माताजी और संघ के साथ हुई घटना के विरोध में आयोजित रैली में 650 से अधिक लोग शामिल हुए. समाज ने राष्ट्रीय संत सुरक्षा नीति लागू करने और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग उठाई. इससे जुड़ी खबर नीचे पढ़ें.

रांची से राजकुमार लाल की रिपोर्ट

Ranchi News: झारखंड की राजधानी रांची में सोमवार को समस्त जैन समाज एवं विभिन्न सामाजिक-धार्मिक संगठनों के संयुक्त तत्वावधान में “राष्ट्रीय संत सुरक्षा अभियान” के तहत एक विशाल शांतिपूर्ण मौन रैली का आयोजन किया गया. यह रैली हाल ही में विहाररत पूज्य आर्यिका माताजी और उनके संघ के साथ हुई दुखद घटना के विरोध में निकाली गई. साथ ही संतों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग भी प्रमुख रूप से उठाई गई. सुबह 7:30 बजे शुरू हुई इस रैली में बड़ी संख्या में जैन समाज के लोगों ने भाग लिया. रैली पूरी तरह शांतिपूर्ण, अनुशासित और अहिंसात्मक रही. आयोजन के दौरान प्रशासनिक दिशा-निर्देशों और कानून-व्यवस्था का पूरी तरह पालन किया गया.

संतों की सुरक्षा को लेकर समाज में बढ़ी चिंता

जैन समाज के लोगों ने कहा कि जैन साधु-संत अहिंसा, संयम और त्याग के प्रतीक होते हैं. वे निहत्थे और पैदल विहार करते हुए समाज को शांति, प्रेम और मानवता का संदेश देते हैं. ऐसे संतों के साथ लगातार बढ़ रही दुर्घटनाएं और असुरक्षा की घटनाएं पूरे समाज के लिए चिंता का विषय हैं. समाज के प्रतिनिधियों ने कहा कि संतों की सुरक्षा केवल किसी एक समुदाय का विषय नहीं बल्कि यह सामाजिक और नैतिक जिम्मेदारी का भी मुद्दा है. संत समाज की रक्षा और सम्मान सुनिश्चित करने के लिए सरकार और प्रशासन को गंभीर कदम उठाने की जरूरत है.

सरकार और प्रशासन के सामने रखी गईं पांच प्रमुख मांगें

रैली के माध्यम से जैन समाज ने केंद्र और राज्य सरकार के साथ प्रशासन के सामने कई महत्वपूर्ण मांगें रखीं. इनमें प्रमुख रूप से हाल की घटना की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच की मांग शामिल रही. इसके अलावा संत सुरक्षा प्रोटोकॉल को तत्काल लागू करने, राष्ट्रीय संत सुरक्षा नीति बनाने, दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई करने और संतों के विहार मार्गों पर सुरक्षा एवं प्रशासनिक समन्वय सुनिश्चित करने की मांग उठाई गई. समाज के लोगों का कहना था कि यदि समय रहते संतों की सुरक्षा के लिए ठोस नीति नहीं बनाई गई तो भविष्य में ऐसी घटनाएं और बढ़ सकती हैं.

रैली में बड़ी संख्या में शामिल हुए लोग

मौन रैली में जैन समाज के करीब 650 सदस्य शामिल हुए. पूरे रैली मार्ग पर अनुशासन और शांतिपूर्ण माहौल देखने को मिला. लोगों ने हाथों में बैनर और संदेश पट्टिकाएं लेकर संत सुरक्षा की मांग की. इस रैली में अमरचंद बेगानी, पूरणमल सेठी, सुरेश बोथरा, प्रदीप बाकलीवाल, विमल दसानी, जितेन्द्र छाबड़ा, मनोज काला, राकेश बच्छावत, संजय छाबड़ा, हेमन्त सेठी, मुकेश बाकलीवाल, कमल पाटोदी, राजकुमार काला, धर्मेन्द्र छाबड़ा, विनीता सेठी, स्मिता काशलीवाल, ममता पापड़ीवाल, प्रतिभा बड़जात्या, स्मिता पांड्या, मधु काला और सुनीता काला समेत कई लोग शामिल हुए.

शांतिपूर्ण तरीके से निकाली गई रैली

रैली के दौरान लोगों ने किसी तरह का नारेबाजी या प्रदर्शन नहीं किया. सभी लोग मौन रहकर संतों की सुरक्षा के प्रति अपनी चिंता और संवेदना प्रकट कर रहे थे. रैली का उद्देश्य केवल समाज और प्रशासन का ध्यान संतों की सुरक्षा की ओर आकर्षित करना था. कार्यक्रम के दौरान कई सामाजिक संगठनों ने भी जैन समाज की मांगों का समर्थन किया और कहा कि संतों की सुरक्षा को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर ठोस नीति बननी चाहिए.

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देशव्यापी जागरूकता अभियान का हिस्सा है रैली

इस पूरे आयोजन की जानकारी मीडिया प्रभारी राकेश काशलीवाल ने दी. उन्होंने कहा कि यह अभियान केवल एक दिन का कार्यक्रम नहीं है बल्कि संतों की सुरक्षा और सम्मान को लेकर देशव्यापी जागरूकता अभियान का हिस्सा है. उन्होंने बताया कि जैन समाज आगे भी शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से अपनी मांगों को सरकार तक पहुंचाता रहेगा ताकि संत समाज को सुरक्षित वातावरण मिल सके.

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Published by: KumarVishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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