Jharkhand Academic Council: झारखंड एकेडमिक काउंसिल (जैक) में उपाध्यक्ष का पद करीब डेढ़ वर्ष से खाली पड़ा है, जबकि परिषद में सदस्यों के 19 स्वीकृत पदों में से 13 भी रिक्त हैं. इस स्थिति का असर जैक के प्रशासनिक और शैक्षणिक कार्यों पर पड़ रहा है. कई महत्वपूर्ण समितियों के संचालन, शैक्षणिक संस्थानों की प्रस्वीकृति और निरीक्षण संबंधी प्रक्रियाएं भी प्रभावित होने की आशंका जतायी जा रही है.
17 जनवरी को समाप्त हो गया उपाध्यक्ष का कार्यकाल
जैक के तत्कालीन उपाध्यक्ष विनोद सिंह का तीन वर्षों का कार्यकाल 17 जनवरी 2025 को समाप्त हो गया था. इसके बाद से अब तक सरकार ने नए उपाध्यक्ष की नियुक्ति नहीं की है. उपाध्यक्ष का पद खाली रहने से कई जिम्मेदारियां लंबित हैं, क्योंकि यह पद केवल प्रशासनिक नहीं, बल्कि परिषद के कई महत्वपूर्ण निर्णयों से भी जुड़ा हुआ है.
दुमका कार्यालय की जिम्मेदारी भी उपाध्यक्ष के पास
जैक के उपाध्यक्ष अपने नियमित दायित्वों के अलावा दुमका स्थित क्षेत्रीय कार्यालय के प्रभारी भी होते हैं. इसके अलावा शैक्षणिक संस्थानों की प्रस्वीकृति से जुड़े मामलों में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रहती है. निरीक्षण दलों में सदस्यों की नियुक्ति, विभिन्न समितियों की अध्यक्षता और कई प्रशासनिक फैसलों में भी उपाध्यक्ष की भागीदारी अनिवार्य मानी जाती है. जैक अधिनियम के अनुसार, परिषद की बोर्ड बैठकों में कोरम को लेकर भी स्पष्ट प्रावधान हैं. ऐसे में बड़ी संख्या में सदस्य पद रिक्त रहने से निर्णय प्रक्रिया पर भी असर पड़ सकता है.
19 में से केवल छह सदस्य ही कार्यरत
जैक में कुल 19 सदस्यों का प्रावधान है, लेकिन वर्तमान में केवल छह सदस्य ही कार्यरत हैं. यानी 13 पद लंबे समय से खाली पड़े हैं. शिक्षा जगत से जुड़े लोगों का कहना है कि इतने बड़े पैमाने पर रिक्तियां रहने से परिषद की कार्यक्षमता प्रभावित होना स्वाभाविक है. कई समितियों के गठन और निर्णय लेने की प्रक्रिया भी धीमी पड़ सकती है.
संघर्ष मोर्चा ने सरकार को चेताया
झारखंड राज्य वित्तरहित शिक्षा संघर्ष मोर्चा ने इस मामले को गंभीर बताते हुए सरकार से अविलंब उपाध्यक्ष और सदस्यों के रिक्त पद भरने की मांग की है. मोर्चा के नेता रघुनाथ सिंह ने कहा कि लंबे समय तक पद खाली रखना शिक्षा व्यवस्था के हित में नहीं है. उनका कहना है कि जैक जैसे महत्वपूर्ण संस्थान में नेतृत्व और सदस्य पदों की कमी का असर विद्यालयों और शैक्षणिक संस्थानों से जुड़े अनेक कार्यों पर पड़ रहा है.
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पीआईएल और आंदोलन की चेतावनी
मोर्चा ने स्पष्ट किया है कि यदि जल्द नियुक्तियां नहीं की गयीं तो संगठन आंदोलन करेगा. साथ ही झारखंड हाईकोर्ट में जनहित याचिका (पीआईएल) दायर करने की भी तैयारी की जा रही है. संगठन का कहना है कि सरकार को शिक्षा व्यवस्था से जुड़े इस महत्वपूर्ण संस्थान में लंबित नियुक्तियों पर शीघ्र निर्णय लेना चाहिए, ताकि जैक की प्रशासनिक और शैक्षणिक प्रक्रियाएं पूरी क्षमता के साथ संचालित हो सकें. जैक राज्य में मैट्रिक और इंटर परीक्षाओं के संचालन, परिणाम, प्रस्वीकृति और अन्य शैक्षणिक गतिविधियों का प्रमुख संस्थान है. ऐसे में उपाध्यक्ष और सदस्यों के लंबे समय से खाली पदों को लेकर शिक्षा जगत में चिंता लगातार बढ़ रही है.
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