रांची: कटहल मोड़ स्थित डीएवी हेहल के समीप इस्कॉन की ओर से जन्माष्टमी महा महोत्सव का आयोजन भक्तिभाव और उल्लास के साथ किया गया. सुबह 4:30 बजे मंगल आरती के साथ महोत्सव की शुरुआत हुई. इसके बाद भगवान के दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ जुटने लगी.
कीर्तन और सांस्कृतिक कार्यक्रमों से सजी शाम
मुख्य कार्यक्रम की शुरुआत शाम चार बजे कीर्तन से हुई. पुरुष भक्त धोती-कुर्ता और महिलाएं साड़ी पहनकर माथे पर तिलक लगाये महोत्सव में शामिल हुईं. कई अभिभावक अपने बच्चों को राधा-कृष्ण के रूप में सजाकर कार्यक्रम में लेकर पहुंचे.
शाम छह बजे प्रह्लाद गुरुकुल के बच्चों ने नृत्य की प्रस्तुति दी. इसके बाद इस्कॉन यूथ फोरम के भक्तों ने युवाओं को प्रेरित करने के उद्देश्य से नाटक और नृत्य प्रस्तुत किया. इस्कॉन गर्ल्स फोरम की भक्तों ने भी आकर्षक नृत्य की प्रस्तुति दी.
कथा के माध्यम से बताया श्रीकृष्ण जन्म का महत्व
लीला पुरुषोत्तम दास ने कथा के माध्यम से भगवान श्रीकृष्ण के जन्म के आध्यात्मिक महत्व पर प्रकाश डाला. उन्होंने कहा कि भगवान हर युग में धर्म की स्थापना के लिए अवतरित होते हैं.
रात 10 बजे श्री राधाकृष्ण का 108 विभिन्न द्रव्यों से अभिषेक किया गया. इसमें विभिन्न नदियों का जल, दूध, दही, मधु, घी समेत कई अन्य द्रव्य शामिल थे.
आधी रात को हुआ जन्मोत्सव, भक्तों में बांटा गया प्रसाद
रात 12 बजे पूजा-अर्चना के बाद भगवान को विभिन्न स्वादिष्ट व्यंजनों का भोग लगाया गया. इसके बाद श्रद्धालुओं के बीच प्रसाद का वितरण किया गया. जन्मोत्सव के दौरान भक्तिभाव का माहौल बना रहा.
झांकियों में दिखीं कृष्ण की बाल लीलाएं
महोत्सव स्थल पर गोकुल-वृंदावन की थीम पर आकर्षक झांकियां सजायी गयी थीं. इनमें कालिया नाग, माखनचोर, गोवर्धन, पूतना और भगवान श्रीकृष्ण की विभिन्न बाल लीलाओं को प्रदर्शित किया गया. झांकियां श्रद्धालुओं के आकर्षण का प्रमुख केंद्र रहीं.
भक्तों ने झांकियों के दर्शन करने के साथ उनकी तस्वीरें भी अपने कैमरों में कैद कीं. श्रद्धालुओं की बड़ी संख्या को देखते हुए आयोजन स्थल पर करीब 1.20 लाख वर्गफीट में विशाल पंडाल बनाया गया था.
