Ranchi News : युवा देश का भविष्य ही नहीं, वर्तमान भी हैं

अंतरराष्ट्रीय युवा दिवस हमें यह याद दिलाता है कि युवा सिर्फ “देश का भविष्य” नहीं हैं, वे वर्तमान भी हैं.

अंतरराष्ट्रीय युवा दिवस आज,

इस वर्ष 2025 की थीम है : “स्थानीय स्तर पर युवाओं के काम, जो सतत विकास लक्ष्यों और उससे आगे तक असर डालें.” मतलब, बदलाव सिर्फ बड़े-बड़े मंचों से नहीं आता, बल्कि आपके अपने मोहल्ले, शहर और गांव से भी शुरू हो सकता है.

झारखंड देश के उन राज्यों में से है, जहां युवा आबादी सबसे तेजी से बढ़ रही है. राज्य में करीब 38% जनसंख्या 15 से 29 वर्ष के बीच है.

अंतरराष्ट्रीय युवा दिवस हमें यह याद दिलाता है कि युवा सिर्फ “देश का भविष्य” नहीं हैं, वे वर्तमान भी हैं. उनके फैसले, उनके विचार और उनका साहस आज ही देश की दिशा तय कर रहा है. एक दिन जो पूरी दुनिया को यह याद दिलाने के लिए मनाया जाता है कि बदलाव की असली ताकत सड़कों, संसदों और प्रयोगशालाओं में जुटी इसी युवा पीढ़ी के पास है. संयुक्त राष्ट्र ने 12 अगस्त को अंतरराष्ट्रीय युवा दिवस घोषित किया ताकि युवाओं के सामने आने वाली चुनौतियों और उनके योगदान को वैश्विक मंच पर जगह मिल सके. किसी भी देश के विकास की असली ताकत उसके युवा होते हैं. जिस रफ्तार से युवा आगे बढ़ते हैं, उसी गति से देश भी प्रगति करता है. प्रस्तुत है वरीय संवाददाता लता रानी की विशेष रिपोर्ट…झारखंड के युवा आज अपनी प्रतिभा, साहस और मेहनत से देश-दुनिया में पहचान बना रहे हैं. खेती से लेकर स्टार्टअप, खेल से लेकर कला, तकनीक से लेकर सामाजिक सेवा. हर क्षेत्र में उन्होंने साबित किया है कि सपनों को सच करने के लिए सीमाएं मायने नहीं रखतीं. रांची से दुमका तक, गिरिडीह से चाईबासा तक, झारखंड के युवा अपने हुनर से न सिर्फ खुद को, बल्कि पूरे राज्य को नयी उड़ान दे रहे हैं. झारखंड के ये युवा उदाहरण हैं कि दृढ़ संकल्प और सकारात्मक सोच से किसी भी दिशा में सफलता हासिल की जा सकती है. बैंकिंग, वित्त, सौंदर्य या खाद्य उद्योग. हर क्षेत्र में उन्होंने न केवल खुद को स्थापित किया, बल्कि दूसरों के लिए भी अवसर बनाये.

15 लाख रुपये की नौकरी छोड़ खेती शुरू किया

अविनाश पाठक : रांची के चांदनी चौक निवासी अविनाश पाठक आइएसएम से एमबीए करने के बाद एक्सिस बैंक में ऑपरेशन हेड के पद पर कार्यरत थे. सालाना 15 लाख रुपये के पैकेज के बावजूद उन्होंने वर्ष 2017 में मशरूम की खेती शुरू की और वर्ष 2022 में बैंक की नौकरी छोड़ दी. श्रमकाफ्ट प्रालि की स्थापना की, जो रांची और आसपास के 12 स्थानों पर मशरूम का बड़े पैमाने पर उत्पादन कर रही है. मशरूम से हेल्दी नूडल्स और अन्य उत्पाद तैयार किये जाते हैं. जिनकी मांग दूसरे राज्यों तक है.युवाओं के लिए अविनाश का संदेश : तीन कमरे और दो लोगों से शुरुआत की थी. आज इस कंपनी से 70 परिवारों का घर चलता है. युवाओं को नौकरी लेने से अधिक नौकरी देने पर ध्यान देना चाहिए.

वित्तीय सुझाव और मार्गदर्शन से युवाओं का राह कर रहे आसान

सुशांत कुमार : कोकर निवासी सुशांत कुमार मुंबई स्थित एमएनसी अर्न्स्ट एंड यंग में चार्टर्ड अकाउंटेंट हैं और भारतीय कंपनियों के लिए काम करते हैं. संयोग से उनका जन्मदिन भी 12 अगस्त को ही है. संत जेवियर्स कॉलेज से बीकॉम के साथ-साथ उन्होंने सीए की पढ़ाई पूरी की. वे लिंक्डइन पर वित्तीय सुझाव और मार्गदर्शन संबंधी लेख लिखते हैं, जिन्हें युवाओं द्वारा खूब सराहा जाता है. वर्तमान में फॉलोअर्स की संख्या सैकड़ों में है, जो युवाओं को निवेश, सही मार्गदर्शन और करियर संबंधी सुझाव देते हैं.युवाओं के लिए सुशांत का संदेश : हमारे देश के युवाओं में अपार प्रतिभा है. इस क्षमता का उपयोग अपने देश के लिए करें, ताकि हमें बाहरी निर्भरता से मुक्त हो सके. इसके लिए आज से ही शुरुआत करें.

हमेशा नौकरी देने वाली बनने का सपना देखा

रीमा प्रियंका बारला : कोकर निवासी रीमा प्रियंका बारला अकाउंट्स ऑनर्स की पढ़ाई के बाद फिटनेस ट्रेनर और जिम इंस्ट्रक्टर के रूप में काम कर रही थीं. मेकअप आर्टिस्ट के रूप में महिलाओं को प्रशिक्षण देना शुरू किया. अब तक वे लगभग 400 युवतियों को ग्रूमिंग प्रोफेशन से जोड़ चुकी हैं और पूरे झारखंड में 15-20 महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ा है, जिनकी मासिक आय 50 हजार से एक लाख रुपये तक है. सोशल मीडिया के माध्यम से उनका काम देश और विदेश में पहुंचा है. हाल ही में वे पोलैंड में ग्रूमिंग सेशन देकर लौटी हैं.युवाओं के लिए रीमा का संदेश : मैंने हमेशा नौकरी देने वाली बनने का सपना देखा. आज महिलाएं मुझसे प्रेरित होती हैं, यह मेरी सबसे बड़ी उपलब्धि है. अब लगता है सपना सच हो गया.

विदेश से लौटकर बेकरी फैक्ट्री खोली, युवाओं को दिया रोजगार

गॉडविन लकड़ा : डिबडीह निवासी गॉडविन लकड़ा ने होटल मैनेजमेंट के बाद दुबई और ओमान के फाइव स्टार होटलों में शेफ के रूप में काम किया. कनाडा और अमेरिका से भी प्रस्ताव मिले, लेकिन वर्ष 2019 में उन्होंने रांची लौटकर केक वॉक बेकरी फैक्ट्री की स्थापना की. पांच वर्षों में यह बेकरी 17 सदस्यों की टीम के साथ देश की सबसे बड़ी आदिवासी बेकरी बन गयी है. गॉडविन पिछले दो वर्षों से आदिवासी युवाओं को बेकरी उत्पाद बनाने का प्रशिक्षण दे रहे हैं, जिससे सैकड़ों युवा आत्मनिर्भर बने हैं.युवाओं के लिए गॉडविन का संदेश : एक आदिवासी उद्यमी अगर ईमानदारी से प्रयास करे तो कम से कम 100 युवाओं को गरीबी और बेरोजगारी से बाहर निकाला जा सकता है.

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झारखंड के युवा सितारे

सलीमा टेटे : हॉकी खिलाड़ी सलीमा टेटे का जन्म सिमडेगा में हुआ. सलीमा बांस की छड़ी से हॉकी खेलना शुरू किया. झारखंड की पहली महिला हॉकी खिलाड़ी हैं, जिन्हें 2025 में राष्ट्रपति के हाथों अर्जुन पुरस्कार दिया गया.पार्वती तिर्की : कवयित्री और शिक्षाविद, गुमला की रहने वाली पार्वती तिर्की को 2025 का साहित्य अकादमी युवा पुरस्कार प्राप्त हुआ है. वह गुमला जिले के कुडुख आदिवासी समुदाय से आती हैं.

साक्षी जैन : साक्षी चार्टर्ड अकाउंटेंट और वित्तीय शिक्षा कंटेंट क्रिएटर हैं. फोर्ब्स अंडर-30 लिस्ट में रांची की साक्षी जैन का नाम शामिल है. सीए साक्षी लोगों कोनिवेश का फंडा बताती हैं.दीपिका कुमारी : विश्व स्तरीय तीरंदाज, जिन्होंने ओलंपिक और विश्व चैंपियनशिप में भारत का प्रतिनिधित्व किया. खेलों में उनका योगदान हजारों युवाओं को प्रेरित करता है.

सलोनी हेमब्रम : एथलीट, जिन्होंने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में पदक जीते और ग्रामीण क्षेत्र की बेटियों के लिए रोल मॉडल बनीं.सुषमा लकड़ा : सिमडेगा की हॉकी खिलाड़ी, जिन्होंने राष्ट्रीय टीम में जगह बनाकर झारखंड की खेल परंपरा को मजबूत किया.

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