रांचीः बुंडू सहित पूरे पंचपरगना क्षेत्र में हरी सब्जियों की खेती किसानों की आमदनी का मजबूत साधन बनती जा रही है. किसान नई तकनीक और उन्नत किस्म के बीजों का इस्तेमाल कर नेनुआ, कद्दू समेत अन्य हरी सब्जियों की खेती कर रहे हैं. किसानों का कहना है कि धान की तुलना में सब्जियों की खेती से कई गुना अधिक आमदनी हो रही है.
धान से कई गुना अधिक आमदनी
ग्रामीण किसान उत्तम महतो और राजकिशोर मुंडा ने बताया कि धान की खेती की तुलना में हरी सब्जियों की खेती से अच्छी आमदनी होती है. नेनुआ और कद्दू की खेती साल भर की जा सकती है. ताऊ वालाडिंग निवासी विश्वनाथ महतो और सुखराम लोहरा के अनुसार, एक एकड़ जमीन में सब्जियों की खेती से अनुमानतः एक लाख रुपये से अधिक की आमदनी होती है. वहीं, धान की खेती से करीब 20 हजार रुपये ही आमदनी होती है.
ये भी पढ़ें- ISIS आतंकी फैजान अंसारी मामले में 8 सितंबर को होगी अगली सुनवाई
रोजाना ट्रक से अधिक सब्जियों की बिक्री
बुंडू प्रखंड के ताऊ, दलकीडीह और जामटोली गांव में किसान बड़े पैमाने पर हरी सब्जियों की खेती कर रहे हैं. इन गांवों से प्रतिदिन एक ट्रक से अधिक हरी सब्जियां बाजार में बिक्री के लिए भेजी जाती हैं. दलकीडीह निवासी धनेश्वर महतो, सिकंदर कोईरी और प्रदीप महतो बताते हैं कि सब्जी की खेती में मेहनत अधिक है, लेकिन वैज्ञानिक तरीके से खेती करने पर कृषि से नौकरी से भी अधिक आमदनी की जा सकती है.
हरी मिर्च और सब्जियों की भी बड़े पैमाने पर बिक्री
बलूवाडीह और तेतला गांव से भी प्रतिदिन एक ट्रक से अधिक हरी मिर्च और अन्य हरी सब्जियों की बिक्री होने की बात बतायी गयी है. किसानों के अनुसार, सामान्य बाजार दर पर भी हरी सब्जियों की खेती से अच्छी आमदनी हो रही है. इन गांवों में खेती किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत करने का जरिया बन रही है.
ये भी पढ़ें- रांची पुलिस का नया एक्शन प्लान, 3 साल से जमे टाइगर मोबाइल जवानों का होगा तबादला
हाट बाजार में सब्जियों के भाव
वर्तमान में हाट-बाजार में सब्जियों की कीमत इस प्रकार है :
- नेनुआ - 30 रुपये
- आलू - 20 रुपये
- कद्दू - 20 रुपये
- टमाटर - 50 रुपये
- प्याज - 50 रुपये
- हरी मिर्च - 80 रुपये
- मूली साग - 30 रुपये
- पालक - 40 रुपये
- कोहड़ा - 20 रुपये
- फूलगोभी - 60 रुपये
- पत्तागोभी - 40 रुपये
- बोदी - 20 रुपये
- भिंडी - 30 रुपये
- परवल - 60 रुपये
- बैंगन - 40 रुपये
- अदरक - 150 रुपये
- कच्चु - 40 रुपये
किसानों का कहना है कि नई तकनीक, बेहतर बीज और वैज्ञानिक तरीके से खेती करने पर सब्जी उत्पादन बढ़ाया जा सकता है और इससे किसानों की आमदनी में भी इजाफा हो सकता है.
