Ranchi News : खेती की पुरानी परंपरा को नीति में शामिल करने की जरूरत
निसा में 24 केवीके वैज्ञानिक और किसानों का सम्मेलन
By SHRAWAN KUMAR | Updated at :
रांची. भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के पूर्व महानिदेशक डॉ हिमांशु पाठक ने कहा कि खेती की पुरानी परंपरा और चीजों को नीति में शामिल करने की जरूरत है. इसको बचाने के लिए सरकारी स्तर पर प्रयास होना चाहिए. मूल रूप से पुरुलिया वाले इलाके के निवासी डॉ पाठक ने कहा कि आज भी किसानों के खेतों में कई ऐसी चीजें हैं, जो संरक्षित नहीं हो रहे हैं. यह काफी पौष्टिक हैं. काफी उपयोगी भी हैं. ऐसी वेराइटी को चिह्नित कर संरक्षित किया जा सकता है. श्री पाठक रविवार को राष्ट्रीय कृषि उच्चतर प्रसंस्करण संस्थान (निसा), नामकुम में आइसीएआर के एक दिवसीय सेमिनार में बोल रहे थे.आयोजन आइसीएआर अटारी पटना ने किया. इसमें पर्यावरण अनुकूल खेती पर विचार किया गया. वक्ताओं ने कहा कि झारखंड में कई ऐसी प्रजातियां हैं, जो कम पानी में भी हो रही हैं. इसका खान-पान पर भी बेहतर असर है. स्वास्थ्य के लिए भी लाभदायक है. इसकी प्रजाति पता लगायी जानी चाहिए. झारखंड में स्थानीय लोग जो उपजाते हैं, वह चावल बासी भी खाया जाता है. लेकिन, हाइब्रिड चावल बासी नहीं खाया जा सकता है. ऐसे उत्पादों का एमएसपी तय करने पर भी बात हुई. इसके लिए राज्य और केंद्र सरकार से अनुशंसा की जायेगी. सेमिनार में निदेशक अटारी, पटना डॉ अंजनी कुमार, आइसीएआर के उप महानिदेशक डॉ राजबीर सिंह, डॉ रंजय कुमार सिंह ने भी विचार रखे. इसमें राज्य के सभी 24 जिलों के आइसीएआर से संपोषित कृषि विज्ञान केंद्रों के वैज्ञानिकों सहित हरेक जिले से चार-चार प्रगतिशील किसानों ने हिस्सा लिया.
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