संजीव सिंह, रांची. झारखंड हाइकोर्ट ने अवमानना मामले की सुनवाई करते हुए बिरसा कृषि विवि प्रशासन को निर्देश दिया है कि चार माह के अंदर कर्मियों को एसीपी व एमएसीपी का एरियर के साथ लाभ दें. समय पर लाभ नहीं देने पर संबंधित अधिकारियों पर कार्रवाई होगी. दूसरी तरफ विवि ने कृषि विभाग को पत्र भेज कर कहा है कि विवि के पास राशि नहीं है. सरकार द्वारा राशि मिलने पर कर्मियों को एसीपी व एमएसीपी का लाभ दे दिया जायेगा. लेकिन विभाग को जब यह पत्र प्राप्त हुआ, तो विभाग ने विवि को पत्र भेज कर कहा कि सरकार ने कर्मियों को एसीपी व एमएसीपी के लाभ के लिए राशि नहीं देने का निर्णय लिया है. अगर विवि चाहे, तो वह अपने आंतरिक स्रोत से कर्मियों को एरियर के साथ एसीपी व एमएसीपी का लाभ दे सकता है. विभाग के अवर सचिव ने कहा है कि विवि एक स्वायत्त सेवी संस्थान है. एसीपी/एमएसीपी के संकल्प के अनुसार स्वायत्त सेवी संस्थान उसकी परिधि में नहीं आते हैं. यदि संस्थान अपने संसाधन से व्यय भार वहन करता है, तो सहमति दिये जाने पर विचार किया जा सकता है. फिलहाल विवि व विभाग के बीच पत्राचार में विवि के 200 से अधिक कर्मियों का एसीपी व एमएसीपी का भुगतान का मामला फंस गया है. इन कर्मियों को एसीपी का लाभ नौ अगस्त 1999 से तथा एमएसीपी का लाभ एक अगस्त 2008 से दिया जाना है. विवि को इन्हें एरियर का साथ भुगतान करना होगा. रांची विवि ने आंतरिक स्रोत से किया है भुगतान : रांची विवि में कार्यरत कर्मियों को एसीपी व एमएसीपी का लाभ आंतरिक स्रोत से देने का निर्णय लिया गया. उच्च व तकनीकी शिक्षा विभाग ने भी राज्य के विवि के कर्मियों को एसीपी व एमएसीपी का लाभ देने से इनकार कर दिया था. इसके बाद विवि ने आंतरिक स्रोत से कर्मियों को सितंबर 2024 से लाभ देने का निर्णय लिया है. बीएयू ने 63 शिक्षकों को एजीपी 8000 रुपये के साथ दी प्रोन्नति : इधर, बीएयू ने कर्मियों के मामले में तो पल्ला झाड़ लिया, लेकिन विवि के 63 शिक्षकों की करियर एडवांसमेंट स्कीम के तहत प्रोन्नति प्रदान कर दी है. इन शिक्षकों को एजीपी 8000 रुपये के साथ प्रोन्नति देने की अधिसूचना जारी कर दी है. विवि ने कृषि विभाग के 16 जनवरी 2025 के गजट नोटिफिकेशन के आधार पर प्रोन्नति प्रदान की है.
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