खदान बंद करने से लेकर प्रभावित क्षेत्रों के विकास तक, पोलैंड-जर्मनी से सीख लेगा झारखंड

झारखंड सरकार कोयला खदानों के बंद होने के बाद के प्रबंधन और पर्यावरण बहाली के लिए जर्मनी और पोलैंड के आधुनिक तरीकों को अपनाएगी. दो वरिष्ठ अधिकारी इन देशों का दौरा कर वहां की व्यवस्थाओं का अध्ययन करेंगे.

रांची. झारखंड सरकार कोयला खदानों को वैज्ञानिक तरीके से बंद करने, पर्यावरण बहाली और प्रभावित क्षेत्रों के आर्थिक विकास की आधुनिक तकनीकों का अध्ययन करायेगी. इसके लिए राज्य के दो आइएएस अधिकारी 19 सितंबर से एक अक्तूबर तक पोलैंड और जर्मनी के दौरे पर जायेंगे. खान विभाग की अनुशंसा पर केंद्रीय कोयला मंत्रालय और विदेश मंत्रालय ने दौरे की अनुमति दे दी है.

अपर सिलेसिया और नॉर्थ राइन-वेस्टफेलिया का करेंगे अध्ययन

नॉलेज एक्सचेंज टूर के तहत झारखंड एक्सप्लोरेशन एंड माइनिंग कॉरपोरेशन लिमिटेड (जेइएमसीएल) के प्रबंध निदेशक वरुण रंजन और धनबाद के उपायुक्त आदित्य रंजन पोलैंड के अपर सिलेसिया और जर्मनी के नॉर्थ राइन-वेस्टफेलिया क्षेत्रों का दौरा करेंगे. दोनों अधिकारी इन क्षेत्रों में खदानों के क्लोजर, पर्यावरण बहाली और खनन प्रभावित इलाकों के आर्थिक विकास के लिए अपनायी जा रही आधुनिक तकनीकों और व्यवस्थाओं का अध्ययन करेंगे.

गिरिडीह और रामगढ़ की दो खदानों के क्लोजर को मिल चुकी है मंजूरी

झारखंड में खदानों के वैज्ञानिक तरीके से क्लोजर और पर्यावरण बहाली को लेकर प्रक्रिया शुरू हो चुकी है. राज्य में गिरिडीह और रामगढ़ की दो खदानों के क्लोजर की अनुमति पहले ही दी जा चुकी है. विदेश दौरे से लौटने के बाद वहां अपनायी जा रही तकनीकों और बेहतर व्यवस्थाओं का अध्ययन राज्य में खदान बंद करने और खनन प्रभावित क्षेत्रों के विकास की प्रक्रिया में उपयोगी हो सकता है.

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By Sunil Choudhary

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सुनील चौधरी को बीबीसी, पैनोस इंटरनेशनल और झारखंड सरकार की फेलोशिप मिल चुकी है. विभिन्न महत्वपूर्ण और खोजी खबरों के लिए उन्हें कई संस्थानों द्वारा कई बार सम्मानित और पुरस्कृत किया गया है.

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