Jharkhand High Court News: झारखंड हाईकोर्ट ने एक याचिका पर फैसला सुनाते हुए कहा है कि भले ही विवाह टूट गया हो, लेकिन कानूनी रूप से पति अपनी पूर्व पत्नी को बेसहारा नहीं छोड़ सकता. पत्नी के मान-सम्मान व जीवन-यापन के लिए उसकी हैसियत के मुताबिक उचित गुजारा भत्ता देना ही होगा. कोर्ट ने लातेहार के एक दंपती के विवाह विवाद में फैमिली कोर्ट के तलाक के फैसले को बरकरार रखा और पत्नी को 30 लाख का स्थायी गुजारा भत्ता देने का आदेश दिया है. कोर्ट ने पति को 30 लाख की राशि 12 महीनों के भीतर चार समान किस्तों में चुकाने का निर्देश दिया है. गुजारा भत्ता की पहली किस्त अगले दो माह के भीतर देनी होगी. कोर्ट ने स्पष्ट किया कि भरण-पोषण दया नहीं बल्कि पत्नी का कानूनी अधिकार है, ताकि वह भविष्य में आत्म सम्मान के साथ जीवन यापन कर सके.
क्या है मामला
दानापुर (बिहार) स्थित एसएसबी की 40वीं बटालियन में सिपाही व लातेहार की महिला का विवाह वर्ष 2017 में हुआ था. पति की याचिका पर लातेहार के फैमिली कोर्ट ने वर्ष 2022 में तलाक की मंजूरी दे दी थी, जिसके खिलाफ पत्नी ने हाईकोर्ट में अपील याचिका दायर की थी. अपील लंबित रहने के दौरान ही जनवरी 2025 में पति ने दूसरा विवाह कर लिया था.
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