रांची . झारखंड हाइकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के एक आदेश के अनुपालन में राज्य की जेलों में बंद कैदियों की सजा माफी (रिमिशन) व समय से पहले रिहाई (प्रीमेच्योर रिलीज) नीतियों के क्रियान्वयन को गंभीरता से लेते हुए स्वत: संज्ञान लिया है. जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद व जस्टिस अरुण कुमार राय की खंडपीठ ने इस जनहित याचिका पर सुनवाई की है. खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान एक व्यापक रिपोर्ट प्राप्त करने के उद्देश्य से झारखंड हाइकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल को प्रक्रिया में प्रतिवादी बनाया तथा उन्हें एक विशिष्ट शपथ पत्र दायर करने का निर्देश दिया. खंडपीठ ने यह भी उल्लेख किया कि सुप्रीम कोर्ट के आठ मई 2025 के आदेश का झारखंड हाइकोर्ट द्वारा अभी तक पालन नहीं किया गया है. खंडपीठ ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 25 नवंबर की तिथि निर्धारित की. वहीं राज्य सरकार की ओर से पेश अधिवक्ता श्रेय मिश्रा ने खंडपीठ को बताया कि इस मुद्दे पर नीतिगत निर्णयों और अन्य अद्यतन जानकारियों के साथ समय पर शपथ पत्र दाखिल किया जायेगा. उल्लेखनीय है कि सुप्रीम कोर्ट ने देश के सभी राज्यों द्वारा उनकी रिमिशन नीतियों के क्रियान्वयन पर नजर रखने और उसकी जांच करने का निर्देश दिया था. साथ ही इस संबंध में एक रिपोर्ट 15 दिसंबर 2025 तक सुप्रीम कोर्ट के विधि सेल को भेजने का भी निर्देश दिया गया है.
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