रांची के हरमू में 'हातु बाई टांव' पर विवाद, आदिवासियों ने हाउसिंग बोर्ड पर धार्मिक स्थल से छेड़छाड़ का लगाया आरोप

रांची के हरमू में आदिवासी धार्मिक स्थल 'हातु बाई टांव' को लेकर विवाद गहरा गया है. स्थानीय समुदाय ने झारखंड हाउसिंग बोर्ड पर धार्मिक स्थल से छेड़छाड़, झंडा व पहचान बोर्ड हटाने का आरोप लगाया है. समुदाय ने स्थल की सुरक्षा और आवंटन न करने का लिखित आश्वासन मांगा है.


रांची से अरविंद कुमार सिंह की रिपोर्ट

Ranchi Hatu Bai Tanw Controversy: रांची के हरमू मौजा स्थित आदिवासी धार्मिक स्थल 'हातु बाई टांव' को लेकर नया विवाद सामने आया है. स्थानीय आदिवासी समुदाय ने झारखंड हाउसिंग बोर्ड पर धार्मिक स्थल से छेड़छाड़ करने, वहां गड्ढे खोदने और सरना झंडा तथा पहचान बोर्ड हटाने का आरोप लगाया है. घटना के विरोध में हरमू बस्ती के कई टोला के लोग हाउसिंग बोर्ड कार्यालय पहुंचे और अधिकारियों से मुलाकात कर स्थल की सुरक्षा तथा लिखित आश्वासन की मांग की.

हातु बाई टांव आदिवासी समाज का पुराना धार्मिक स्थल

स्थानीय लोगों के अनुसार, 'हातु बाई टांव' आदिवासी समाज का सदियों पुराना धार्मिक और सांस्कृतिक स्थल है. किसी व्यक्ति की मृत्यु के बाद अंतिम संस्कार के उपरांत गांव के शुद्धिकरण की पारंपरिक प्रक्रिया यहीं संपन्न होती है. समुदाय का कहना है कि यह स्थल उनके पूर्वजों के समय से धार्मिक आस्था का केंद्र रहा है और इसे किसी भी तरह से आवंटित या विकसित नहीं किया जाना चाहिए.


1964-65 में हाउसिंग बोर्ड ने जमीन अधिग्रहीत किया

स्थानीय निवासी अनिल तिग्गा ने बताया कि वर्ष 1964-65 के दौरान हाउसिंग बोर्ड ने हरमू क्षेत्र की जमीन का अधिग्रहण किया था. उस समय लोगों से घर, नौकरी, सड़क, नाली और अन्य सुविधाएं देने का वादा किया गया था. उनका आरोप है कि बाद में आसपास पूरी हाउसिंग कॉलोनी विकसित हो गयी, लेकिन धार्मिक स्थलों की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं की गयी. अब खाली बची जमीन को दूसरे लोगों के नाम आवंटित करने की कोशिश की जा रही है.

खुली जमीन को खाली समझकर किया जा रहा निर्माण

उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज प्रकृति आधारित संस्कृति का पालन करता है और उनके धार्मिक स्थल पहले से चारदीवारी वाले नहीं होते थे. इसी कारण खुली जमीन को खाली समझकर वहां निर्माण की तैयारी शुरू कर दी गयी. समुदाय का आरोप है कि हाउसिंग बोर्ड की ओर से हाल में वहां खुदाई करायी गयी और स्थल का बोर्ड तथा सरना झंडा उखाड़कर हटा दिया गया, जिससे लोगों में भारी आक्रोश फैल गया.

बड़ी संख्या में हाउसिंग बोर्ड कार्यालय पहुंचे ग्रामीण

विरोध के बाद बड़ी संख्या में ग्रामीण हाउसिंग बोर्ड कार्यालय पहुंचे. प्रदर्शनकारियों का कहना है कि अधिकारियों ने स्वीकार किया कि बोर्ड और झंडा हटाना गलती थी. इसके बाद अधिकारियों ने सरना झंडा और पहचान बोर्ड वापस सौंप दिया. हालांकि ग्रामीणों का कहना है कि मौखिक आश्वासन पर्याप्त नहीं है. उन्हें लिखित रूप में यह भरोसा चाहिए कि भविष्य में इस जमीन का आवंटन नहीं होगा और यहां पारंपरिक पूजा-पद्धति निर्बाध रूप से जारी रहेगी.

हातु बाई टांव के सौंदर्यीकरण की मांग

समुदाय ने सरकार और हाउसिंग बोर्ड से मांग की है कि 'हातु बाई टांव' का सौंदर्यीकरण कराया जाए और इसे आधिकारिक रूप से धार्मिक स्थल के रूप में दर्ज कर कानूनी संरक्षण दिया जाए. लोगों का कहना है कि जिस स्थान पर मृत्यु के बाद गांव की शुद्धिकरण की परंपरा निभायी जाती है, उसे किसी निर्माण परियोजना का हिस्सा बनाना उनकी संस्कृति और धार्मिक आस्था पर चोट है.

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धार्मिक स्थल का दोबारा करेंगे शुद्धिकरण

फिलहाल ग्रामीणों ने कहा है कि वे कुछ दिनों बाद परंपरा के अनुसार स्थल का पुनः शुद्धिकरण करेंगे और पहले की तरह यहां धार्मिक अनुष्ठान जारी रखेंगे. अब उनकी नजर इस बात पर है कि हाउसिंग बोर्ड और प्रशासन लिखित आश्वासन और संरक्षण संबंधी मांगों पर क्या फैसला लेते हैं. मानव सभ्यता की पुरानी आदत फिर सामने है, जहां नक्शे पर खाली दिखी जमीन को इतिहास से भी ज्यादा खाली मान लिया जाता है.

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लेखक के बारे में

By कुमार विश्वत सेन

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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