रांची. अखिल भारतीय प्रगतिशील महिला एसोसिएशन (एपवा) सहित कई महिला संगठनों और सामाजिक कर्मियों ने अल्बर्ट एक्का चौक पर संयुक्त रूप से प्रदर्शन किया. महिलाएं 10 फरवरी को छत्तीसगढ़ हाइकोर्ट के फैसले के खिलाफ प्रतिरोध कर रही थीं. यह मामला 2017 की एक घटना से जुड़ा है, जिसमें पति ने अपनी पत्नी के साथ उसकी इच्छा के विरुद्ध अप्राकृतिक यौन संबंध बनाया था. एपवा का कहना है कि अदालत ने संवैधानिक नैतिकता और महिलाओं के शारीरिक स्वायत्तता के अधिकार को नजरअंदाज किया है, जिसमें यह अधिकार शामिल है कि वे यौन संबंधों से इनकार कर सके, चाहे दूसरा पक्ष उनका पति ही क्यों न हो. आपको बता दें कि अदालत का कहना है कि धारा 377 के तहत अप्राकृतिक यौन संबंध के मामले में भी धारा 375 (बलात्कार) के तहत परिभाषित सहमति की जरूरत नहीं है, क्योंकि, यह पति-पत्नी के बीच का मामला है. विरोध कर रहीं महिला सदस्यों ने कहा कि विधायिका भारतीय दंड संहिता में बलात्कार से जुड़े प्रावधानों से वैवाहिक बलात्कार अपवाद को हटाये. प्रदर्शन में मुख्य रूप से लीना पादम, रोज मधु, एलिस मिंज, हीरा, सिसलिया, कांताबारा, एती तिर्की, सिस्टर मेंरीना, इंद्राणी, सलोमी, एंजेला कुजूर, ललिता तिर्की, स्मृति नाग, नंदिता भट्टाचार्य, मंथन, विनोद कुमार सहित कई महिलाएं शामिल थीं.
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