गोबर-गोइठा से रंगमंच तक का सफर, बुटन देवी ने लोककला में बनाई खास पहचान

झारखंड की लोक कलाकार बुटन देवी ने 43 वर्षों से अधिक समय तक विभिन्न राज्यों में अपनी कला का प्रदर्शन किया है. मिट्टी के घर से उठकर रंगमंच तक का उनका सफर प्रेरणादायक है.

बुंडू. झारखंड के सुप्रसिद्ध लोक कलाकार नर्तकी बुटन देवी 43 वर्षों से झारखंड पश्चिम बंगाल उड़ीसा छत्तीसगढ़ और सीमावर्ती बिहार प्रदेश के सैकड़ो स्थान पर नर्तकी कलाकार रंगमंच में प्रदर्शन कर चुकी है. इनकी पहचान स्वर कोकिला नृत्य की कलाकार के रूप में है. इनका जन्म रांची जिला अंतर्गत सोनाहातू प्रखंड के तेतला गांव में 1 जनवरी 1966 ईस्वी में गरीब आदिवासी परिवार में हुआ.

खेत-खलिहान से रंगमंच तक पहुंचीं बुटन देवी

धूल घसीरत में पली बढ़ी गोबर गोइठा खेत खलियान में का भी काम करते संगीत नृत्य की ओर झुकाव बचपन में ही था. गरीबों के कारण वह स्कूल नहीं जा पाई और पढ़ाई लिखाई नहीं कर पाई.अनपढ़ की जिंदगी में ही एक होनहार नर्तकी कलाकार के रूप में विशिष्ट पहचान बनाई है. नर्तन कलाकार बुटन देवी बतायी है कि 16 वर्ष की उम्र में बुंडू प्रखंड के ताऊ गांव निवासी लोक कलाकार लखीचरण मुंडा मुलाकात होने के बाद संगीतज्ञ नाटक कला टीम के साथ जुड़कर नाच गान का प्रदर्शन करने का कार्य शुभारंभ किया. वर्ष 1983 ईस्वी में लखीचरण मुंडा से शादी के बंधन हो गए.

विश्वनाथ महतो के सहयोग से कला का सफर हुआ और मजबूत

इसके टीम में बुंडू के बालाडिंग गांव के निवासी लोक कलाकार पटकथा लेखक विश्वनाथ महतो से मुलाकात हुई और उनका सहयोग मिला. आगे बुटन देवी बताती है कि प्रचलित संगीत भादर, झूमर, डमकच,नागपुरी, पंचपरनिया, कुरमाली, मुंडारी, संगीतों के स्वर में ढोल नगाड़े बांसुरी विभिन्न वाद्य यंत्रों के साथ पूरी टीम वर्ष 1983 ई से सैकड़ो अखाड़े स्थल पर रंगमंच कला का प्रदर्शन कर लोगों की दिल में समा गए हैं.

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बुटन देवी की बहन सोमवारी देवी भी हैं संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार से सम्मानित

वाद्य यंत्र के रचनाकार विश्वनाथ महतो बताते हैं कि बुटन देवी के टीम में 14 सदस्य टीम है. इस टीम के जरिए सरकारी गैर सरकारी और निजी कार्यक्रम में सैकड़ो स्थान पर कल का प्रदर्शन किया गया है. संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार से सम्मानित सोमवारी देवी भी उनकी सगी छोटी बहन है. दोनों बहनों ने लोक नाटक संगीत नर्तकी कलाकार के रूप में अपने जीवन को न्योछावर कर दिया है. राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार मिलने से दोनों बहन प्रफुल्लित है.

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By अपूर्व कुमार शुक्ला

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