सैनिक माइनिंग के पूर्व कर्मियों ने पांच घंटे ठप कराया उत्पादन

सैनिक माइनिंग कंपनी के पूर्व कर्मियों ने सीएमपीएफ भुगतान की मांग को लेकर गुरुवार की सुबह 10 बजे अशोक परियोजना खदान का कामकाज बंद करा दिया.

सीएमपीएफ राशि की भुगतान को लेकर किया आंदोलन

प्रतिनिधि, पिपरवार

सैनिक माइनिंग कंपनी के पूर्व कर्मियों ने सीएमपीएफ भुगतान की मांग को लेकर गुरुवार की सुबह 10 बजे अशोक परियोजना खदान का कामकाज बंद करा दिया. इससे खदान में डंपरों की लंबी कतार लग गयी. कंपनी के पूर्व कर्मियों ने बताया कि वह 2014 से 23 तक कार्यरत थे. इस दौरान उनके वेतन से सीएमपीएफ मद से निर्धारित राशि की कटौती की गयी. प्रबंधन द्वारा समय पर कंपनी को जमीन उपलब्ध नहीं कराने से कंपनी की मशीने बेकार हो गयी. इससे कंपनी को मशीनों को दूसरी जगह भेजना पड़ा. इससे विवश हो कर सैनिक माइनिंग कंपनी के कर्मियों ने सामूहिक त्याग पत्र दे कर सीएमपीएफ राशि के भुगतान के लिए आवेदन दिया. लेकिन, तीन वर्षों के बाद भी मात्र आठ आवेदनों पर कार्रवाई हुई. अब भी 1200 कर्मियों को खून-पसीने की कमाई वापस नहीं मिली है. जबकि इस दौरान सीसीएल प्रबंधन को कई बार नोटिस देकर आंदोलन किया गया. प्रबंधन द्वारा हर बार उन्हें आश्वासन देकर ठगा गया. बंदी की सूचना मिलने पर एसओपी नागेश गोपाल व मैनेजर संजय कुमार सिंह सहित कई अधिकारी अशोक परियोजना खदान पहुंचे. आंदोलनकारियों को समझाने का प्रयास किया. लेकिन वह नहीं माने. बाद में जीएम की पहल पर दोपहर तीन बजे वार्ता के आश्वासन के बाद कर्मियों ने अपना आंदोलन स्थगित कर दिया.

143 आवेदनों का निष्पादन करने का आश्वासन

शाम में जीएम संजीव कुमार के साथ उनकी वार्ता हुई. इसमें प्रबंधन द्वारा 28 फरवरी तक 143 आवेदनों का निष्पादन करने का आश्वासन दिया गया. इस दौरान कंपनी के पूर्व कंपनियों ने कहा कि सीएमपीएफ की राशि दिलवाने की जिम्मेवारी सीसीएल की है. यदि सीसीएल गंभीरता से उनकी समस्याओं का समाधान नहीं करता है तो वह पुन: बंद के लिए विवश होंगे. इसकी सारी जवाबदेही प्रबंधन की होगी. मौके पर सोनू सिंह, जितेंद्र पासवान, ओम प्रकाश गिरि, प्रकाश राम सहित दर्जनों पूर्व कर्मी उपस्थित थे.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

यह प्रभात खबर का न्यूज डेस्क है। इसमें बिहार-झारखंड-ओडिशा-दिल्‍ली समेत प्रभात खबर के विशाल ग्राउंड नेटवर्क के रिपोर्ट्स के जरिए भेजी खबरों का प्रकाशन होता है।

Read More

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >