Ranchi News : सबसे पहले स्वयं को आत्मनिर्भर बनाना होगा : सरयू

आत्मनिर्भर देश बनाने के लिए सबसे पहले स्वयं को आत्मनिर्भर बनाना होगा.

रांची. आत्मनिर्भर देश बनाने के लिए सबसे पहले स्वयं को आत्मनिर्भर बनाना होगा. आत्मनिर्भर का अर्थ है जीवन और निर्णयों की जिम्मेदारी लेने के लिए अपने स्वयं के निर्णय और क्षमताओं पर भरोसा करना. आत्मनिर्भर का निर्माण आत्मविश्वास, लचीलापन और स्वतंत्रता को बढ़ावा है. बाहरी निर्भरता को कम करना है. उक्त बातें विधायक सरयू राय ने रविवार को एसएन सिन्हा इंस्टीट्यूट में आत्मनिर्भर भारत विषय पर आयोजित सेमिनार में कहीं. उन्होंने कहा कि 12 मई 2020 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 20 लाख करोड़ के आर्थिक पैकेज के साथ आत्मनिर्भर भारत अभियान की शुरूआत की थी. इसके तहत मध्यम वर्ग तथा उद्योग सहित विभिन्न वर्गों की आवश्यकता की पूर्ति का लक्ष्य रखा गया. 2015 में सतत विकास के माध्यम से 17 उद्देश्यों को रखा गया था, जिसमें से आठ पूर्ण कर लिया गया. वहीं 2030 तक विकसित भारत का लक्ष्य है कि शेष उद्देश्य को पूरा करना. देश रक्षा के मामले में तेजी से आत्मनिर्भर हो रहा है.

विज्ञान और प्रौद्योगिकी में आत्मनिर्भर हो रहा देश

पूर्व कुलपति विनोद बिहारी महतो विवि डॉ अंजनी कुमारी श्रीवास्तव ने कहा कि जिस तरह लगभग पांच वर्षों में हमारे देश की सेनाओं ने मिशन सिंदूर को सफल बनाने में स्वदेशी तकनीक का प्रयोग किया. वह आत्मनिर्भरता का प्रतीक है. भारत आज विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में लगातार आत्मनिर्भर हो रहा है. हमें स्थानीय उत्पादन को बढ़ावा देने और विदेशी निर्भरता को कम करना है. भारत ने पिछले दशक में बुनियादी ढांचे के विकास में उल्लेखनीय प्रगति की है. वहीं डॉ कुमारी ज्योत्सना ने कहा कि देश में पर्यावरण पर निर्भरता का इंपैक्ट बहुत गहरा हो सकता है. पर्यावरण पर हमारी आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक गतिविधियां निर्भर हैं. उन्हाेंने बुनियादी ढांचा में वृद्धि, प्रौद्योगिकी संचालित शासन, जनसांख्यिकी और घरेलू मांग को बढ़ावा देने की बात कही.

संसाधनों के अधिक उपयोग से ही आत्मनिर्भर बनेंगे

प्रो पीए तोमर ने कहा कि आत्मनिर्भर भारत का उद्देश्य अपने संसाधनों का अधिक उपयोग करना और आयात पर निर्भरता कम करना है. मौके पर इस अवसर पर ट्रस्ट के सचिव सुधीर कुमार समीर, हरपाल सिंह, डॉ केके सिंह, डॉ ओपी सिंह, धर्मेंद्र तिवारी, अंशुल शरण सहित काफी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित थे. कार्यक्रम में पतरस तिर्की को प्रो नरेंद्र सिंह पुरस्कार से मुख्य अतिथि ने सम्मानित किया.

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Published by: Prabhat gopal jha

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