Ranchi News : फादर कामिल बुल्के को रामचरित मानस पर शोध से मिली पहचान

फादर कामिल बुल्के की पुण्यतिथि 17 अगस्त को मनायी गयी. फादर बुल्के ईसाई मिशनरी थे, पर उन्हें ईसाइयों से कहीं ज्यादा पहचान मिली हिंदू समाज के बीच

अंतिम समय तक 13500 किताबें थी फादर कामिल बुल्के के पास

रांची(प्रवीण मुंडा). फादर कामिल बुल्के की पुण्यतिथि 17 अगस्त को मनायी गयी. फादर बुल्के ईसाई मिशनरी थे, पर उन्हें ईसाइयों से कहीं ज्यादा पहचान मिली हिंदू समाज के बीच. न सिर्फ रामचरित मानस पर शोध के लिए बल्कि हिंदी भाषा को समृद्ध करने में उनके अतुलनीय योगदान के लिए भी. फादर कामिल बुल्के का जन्म एक सितंबर 1909 को रम्सकपैले (बेल्जियम) में हुआ था. वर्ष 1930 में उन्होंने लूबेन विश्वविद्यालय में बीएससी इंजीनियरिंग की पढ़ाई की. उसी वर्ष उन्होंने 23 सितंबर को यीशु संघ में प्रवेश किया. अक्तूबर 1935 में उनका भारत आगमन हुआ. 21 नवंबर 1941 को कर्सियांग में उनका पुरोहिताभिषेक हुआ. 1947 में उन्होंने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से हिंदी में एमए और 1949 में डी फिल किया. 1950 से 1977 तक वे संत जेवियर्स कॉलेज रांची में हिंदी संस्कृत विभाग के विभागाध्यक्ष रहे. 1974 में उन्हें भारत के राष्ट्रपति द्वारा पद्मभूषण से सम्मानित किया गया.

इतनी सटीक व्याख्या की कि अनुमति देनी पड़ी

फादर कामिल बुल्के के छात्र और बाद में उनके साथ काम करनेवाले फादर इमानुएल बाखला अभी फादर कामिल बुल्के शोध संस्थान के निदेशक हैं. उन्होंने कहा कि बेल्जियम में पढ़ाई के दौरान ही फादर कामिल बुल्के ने तुलसीदास की कुछ पंक्तियों को पढ़ने का मौका मिला. उस समय उन्हें भारत आने, हिंदी सीखने और तुलसीदास के रामचरितमानस पर शोध करने की इच्छा जागी. भारत आने के बाद जब वे इलाहाबाद विश्वविद्यालय में रामचरितमानस पर शोध करने की बात कही तो शुरू में वहां के प्राध्यापकों ने इस पर शंका व्यक्त की. एक विदेशी और उस पर भी ईसाई आखिर रामचरित मानस पर शोध कैसे कर सकता है. उन्होंने फादर बुल्के को रामचरितमानस की कुछ पंक्तियों की व्याख्या करने को कहा. फादर बुल्के ने उन पंक्तियों की इतनी सटीक व्याख्या की कि उन्हें शोध करने की अनुमति देनी पड़ी.

रामचरितमानस पर उन्होंने जो शोध किया वह अद्भुत था. फादर इमानुएल बताते हैं कि फादर बुल्के के पास रामचरितमानस की अलग-अलग 33 किताबें थी. उनके पास अपनी निजी संग्रह में विभिन्न विषयों पर 13500 किताबें थी. उनकी मृत्यु के बाद उन किताबों को व्यवस्थित करने में महीनों लग गये थे. आज वे किताबें संत जेवियर्स कॉलेज में है. कुछ किताबें मनरेसा हाउस स्थित शोध संस्थान में भी है.

फादर बुल्के का दूसरा बड़ा योगदान अंग्रेजी-हिंदी शब्दकोश

फादर बुल्के का दूसरा बड़ा योगदान अंग्रेजी-हिंदी शब्दकोश है. यह कोश इतना सारगर्भित है कि इसमें शब्दों के अर्थ, अर्थ विस्तार व उच्चारण भी दिया हुआ है. इस शब्दकोश को पूरा करने में उन्होंने सालों लगा दिये. वे जीवन के अंतिम समय में बाइबल का हिंदी अनुवाद कर रहे थे. उम्र और खराब स्वास्थ्य के कारण थोड़ा काम बाकी रह गया था. उन्होंने यह दायित्व अपने मित्र, सहयोगी और हिंदी के विद्वान डॉ दिनेश्वर प्रसाद को सौंपा था. फादर इमानुएल कहते हैं फादर कामिल बुल्के का पूरा जीवन अध्ययन और शोध को समर्पित रहा. उन्होंने हिंदी साहित्य को समृद्ध करने में अतुलनीय योगदान दिया. उन्हें हमेशा यह कसक रही कि यहां के विद्यार्थियों की हिंदी भाषा में रुचि नहीं रही. इसलिए उन्होंने कक्षाओं में पढ़ाना छोड़ दिया था. उसकी जगह वे अपने शोध काम में ही जुटे रहे.

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