स्क्रैप चोरी मामले में 10 दिन बाद भी दर्ज नहीं हुई प्राथमिकी

रोहिणी परियोजना के वर्कशॉप से स्क्रैप की आड़ में कीमती पार्ट्स चोरी के प्रयास का मामला पकड़ में आने के दस दिन बाद भी थाने में मामला दर्ज नहीं कराया गया.

प्रतिनिधि, डकरा

रोहिणी परियोजना के वर्कशॉप से स्क्रैप की आड़ में कीमती पार्ट्स चोरी के प्रयास का मामला पकड़ में आने के दस दिन बाद भी थाने में मामला दर्ज नहीं कराया गया. घटना के दिन से सीसीएल के अधिकारी लगातार बयान देते रहे हैं कि मामला दर्ज कराया जायेगा. स्क्रैप उठाव के लिए बनी कमेटी में शामिल अधिकारी पहले घटना का जिम्मेवार सीआइएसफ जवानों को बताने का प्रयास किया, लेकिन सीआइएसएफ जवानों की मुस्तैदी से जब खुद घिरने लगे तब पार्ट्स बचाने का श्रेय सीआइएसफ को देते हुए पुलिस में रिपोर्ट दर्ज कराने की बात कहने लगे. अब एफआइआर दर्ज नहीं कराने और कंपनी को ब्लैकलिस्ट नहीं करने को लेकर सौदा तय किया गया. पांच लाख रुपये में सौदा तय किया गया है. कंपनी इस शर्त पर रुपये देने के लिए तैयार हुई है कि यदि थाना में मामला दर्ज हुआ तो वह अधिकारियों के बजाए पुलिस को रुपये देंगे. यही वजह है कि जिन अधिकारियों पर सीसीएल की संपत्ति बचाने की जिम्मेदारी थी वह अब चोरी में शामिल कंपनी को बचाने में लगे हैं.

आज ऑनलाइन एफआइआर दर्ज हो जायेगी

एनके एरिया के सुरक्षा अधिकारी नीतीश झा से जब बुधवार को पूछा गया तो उन्होंने कहा कि एफआइआर दर्ज हो गया है. जब गुरुवार को पूछा गया तो कहा कि मैं छुट्टी पर था आज ऑनलाइन एफआइआर दर्ज जरूर हो जायेगी. घटना के बाद से ही ट्रक और स्क्रैप सीआइएसएफ जवानों के कब्जे में है. 17 जून को हुई कथित ऑर्मेचर चोरी मामले में सीआइएसएफ के तीन जवानों पर हुई कार्रवाई और दर्जनों जवानों का तबादला के कारण जो बल की बदनामी हुई है उसके कारण बल अब सावधान है.

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