प्रतिनिधि, रातू.
झारखंड शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद के विद्यालय नेतृत्व अकादमी प्रांगण में आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार के दूसरे दिन भी “कौशल-आधारित शिक्षा के माध्यम से युवा सशक्तिकरण : विकसित भारत 2047 हेतु योगदान” विषय पर गहन मंथन किया गया. सेमिनार में शोध प्रस्तुतीकरण, केस स्टडी, वीडियो डॉक्यूमेंट्री और समूह चर्चा के माध्यम से शिक्षा में नवाचार व कौशल विकास की भूमिका पर विचार-विमर्श हुआ. देश के विभिन्न राज्यों के शिक्षाविदों, प्रधानाध्यापकों और शिक्षकों ने विद्यालयीय स्तर पर कौशल-आधारित शिक्षा के सफल प्रयोगों, अनुभवात्मक अधिगम, व्यावसायिक कौशल, डिजिटल दक्षता और जीवन कौशल के एकीकरण से जुड़े अपने शोध निष्कर्ष साझा किये. वक्ताओं ने कहा कि विद्यालय शिक्षा यदि युवाओं को आत्मनिर्भर, रोजगारोन्मुखी और नवाचारी बनायें, तो विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को साकार करने में अहम भूमिका निभा सकती है. सेमिनार में सक्रिय सहभागिता निभानेवाले 102 प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र दिया गया. जीसीइआरटी के उपनिदेशक प्रदीप कुमार चौबे ने कहा कि कौशल-आधारित शिक्षा समय की आवश्यकता है और अकादमिक ज्ञान के साथ व्यावहारिक व जीवन कौशल का समन्वय युवाओं को भविष्य की चुनौतियों के लिए सक्षम बनायेगा. विद्यालय नेतृत्व अकादमी की नोडल डॉ नीलम रानी ने सेमिनार के उद्देश्यों और भावी कार्ययोजना पर प्रकाश डालते हुए शिक्षकों को विद्यालयीय शिक्षा में कौशल-आधारित नवाचार लागू करने के लिए प्रेरित किया.जीसीइआरटी में राष्ट्रीय सेमिनार का समापनB
डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
