Ranchi: डीवीसी की एनओसी में फंसी 6 जिलों की जलापूर्ति योजनाएं, 104 करोड़ रुपये का है बकाया

Ranchi: डीवीसी की एनओसी नहीं मिलने से छह जिलों की महत्वपूर्ण जलापूर्ति योजनाएं प्रभावित हो रही हैं. 104 करोड़ रुपये के बकाया भुगतान के चलते परियोजनाओं के आगे बढ़ने में अड़चन आ रही है. पूरी रिपोर्ट नीचे पढ़ें...

विवेक चंद्रा
Ranchi: झारखंड के छह जिलों में हजारों लोगों को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने की महत्वाकांक्षी जलापूर्ति योजनाएं दामोदर घाटी निगम (डीवीसी) की अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) नहीं मिलने के कारण अटक गयी हैं. डोमचांच, झुमरी तिलैया, धनबाद, बड़की सरैया, धनवार और जामताड़ा की योजनाओं के लिए वाटर ड्रॉवल और इंटेक वेल निर्माण संबंधी करार अब तक नहीं हो सका है. इससे इन क्षेत्रों में जलापूर्ति परियोजनाओं की प्रगति प्रभावित हो रही है.

मुख्यमंत्री ने किया हस्तक्षेप

डीवीसी ने राज्य सरकार को स्पष्ट कर दिया है कि विभिन्न परियोजनाओं के लिए जल शुल्क मद में 104 करोड़ रुपये की बकाया राशि है. जब तक इस राशि का भुगतान नहीं किया जाता अथवा भुगतान संबंधी ठोस आश्वासन नहीं मिलता, तब तक संबंधित योजनाओं के लिए एनओसी जारी नहीं की जायेगी. डीवीसी के इस रुख से कई महत्वपूर्ण परियोजनाएं अधर में लटक गयी हैं. मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और मुख्य सचिव के स्तर पर हस्तक्षेप किया गया. इसके बाद झारखंड अर्बन इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कंपनी (जुडको) ने 28 मई 2026 को 59.43 लाख रुपये की अंतर राशि का भुगतान डीवीसी को किया. भुगतान के बाद करार प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की पहल शुरू की गयी है.

योजनाओं को अंतिम मंजूरी का इंतजार

हालांकि इसके बावजूद जामताड़ा और झुमरी तिलैया समेत कई योजनाओं को अब भी अंतिम मंजूरी का इंतजार है. अधिकारियों का मानना है कि डीवीसी से करार और एनओसी मिलने के बाद ही परियोजनाओं के निर्माण कार्य में तेजी आ सकेगी. राज्य सरकार अब शेष बाधाओं को दूर कर जलापूर्ति योजनाओं को धरातल पर उतारने की कोशिश में जुटी है.

इन योजनाओं पर पड़ा असर

डोमचांच जलापूर्ति योजना
झुमरी तिलैया जलापूर्ति योजना
धनबाद जलापूर्ति योजना
बड़की सरैया जलापूर्ति योजना
धनवार जलापूर्ति योजना
जामताड़ा जलापूर्ति योजना

बाधा की वजह

डीवीसी पर जल शुल्क मद में 104 करोड़ रुपये बकाया.
वाटर ड्रॉवल और इंटेक वेल निर्माण के लिए एनओसी जरूरी.
भुगतान और करार प्रक्रिया पूरी होने तक परियोजनाएं प्रभावित.

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Published by: AmleshNandan Sinha

अमलेश नंदन सिन्हा प्रभात खबर डिजिटल में वरिष्ठ पत्रकार के रूप में कार्यरत हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता में 20 से अधिक वर्षों का अनुभव है. रांची विश्वविद्यालय से पत्रकारिता की पढ़ाई करने के बाद से इन्होंने कई समाचार पत्रों के साथ काम किया. इन्होंने पत्रकारिता की शुरुआत रांची एक्सप्रेस से की, जो अपने समय में झारखंड के विश्वसनीय अखबारों में से एक था. एक दशक से ज्यादा समय से ये डिजिटल के लिए काम कर रहे हैं. झारखंड की खबरों के अलावा, समसामयिक विषयों के बारे में भी लिखने में रुचि रखते हैं. विज्ञान और आधुनिक चिकित्सा के बारे में देखना, पढ़ना और नई जानकारियां प्राप्त करना इन्हें पसंद है.

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