विवेक चंद्रा
Ranchi: झारखंड के छह जिलों में हजारों लोगों को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने की महत्वाकांक्षी जलापूर्ति योजनाएं दामोदर घाटी निगम (डीवीसी) की अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) नहीं मिलने के कारण अटक गयी हैं. डोमचांच, झुमरी तिलैया, धनबाद, बड़की सरैया, धनवार और जामताड़ा की योजनाओं के लिए वाटर ड्रॉवल और इंटेक वेल निर्माण संबंधी करार अब तक नहीं हो सका है. इससे इन क्षेत्रों में जलापूर्ति परियोजनाओं की प्रगति प्रभावित हो रही है.
मुख्यमंत्री ने किया हस्तक्षेप
डीवीसी ने राज्य सरकार को स्पष्ट कर दिया है कि विभिन्न परियोजनाओं के लिए जल शुल्क मद में 104 करोड़ रुपये की बकाया राशि है. जब तक इस राशि का भुगतान नहीं किया जाता अथवा भुगतान संबंधी ठोस आश्वासन नहीं मिलता, तब तक संबंधित योजनाओं के लिए एनओसी जारी नहीं की जायेगी. डीवीसी के इस रुख से कई महत्वपूर्ण परियोजनाएं अधर में लटक गयी हैं. मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और मुख्य सचिव के स्तर पर हस्तक्षेप किया गया. इसके बाद झारखंड अर्बन इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कंपनी (जुडको) ने 28 मई 2026 को 59.43 लाख रुपये की अंतर राशि का भुगतान डीवीसी को किया. भुगतान के बाद करार प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की पहल शुरू की गयी है.
योजनाओं को अंतिम मंजूरी का इंतजार
हालांकि इसके बावजूद जामताड़ा और झुमरी तिलैया समेत कई योजनाओं को अब भी अंतिम मंजूरी का इंतजार है. अधिकारियों का मानना है कि डीवीसी से करार और एनओसी मिलने के बाद ही परियोजनाओं के निर्माण कार्य में तेजी आ सकेगी. राज्य सरकार अब शेष बाधाओं को दूर कर जलापूर्ति योजनाओं को धरातल पर उतारने की कोशिश में जुटी है.
इन योजनाओं पर पड़ा असर
डोमचांच जलापूर्ति योजना
झुमरी तिलैया जलापूर्ति योजना
धनबाद जलापूर्ति योजना
बड़की सरैया जलापूर्ति योजना
धनवार जलापूर्ति योजना
जामताड़ा जलापूर्ति योजना
बाधा की वजह
डीवीसी पर जल शुल्क मद में 104 करोड़ रुपये बकाया.
वाटर ड्रॉवल और इंटेक वेल निर्माण के लिए एनओसी जरूरी.
भुगतान और करार प्रक्रिया पूरी होने तक परियोजनाएं प्रभावित.
ये भी पढ़ें…
रांची में दूसरे दिन भी जारी रहा मनरेगा कर्मियों का महाधरना, 17 जून से आमरण अनशन की चेतावनी
Ranchi: कृषि-व्यापार मेले का CM हेमंत सोरेन ने किया उद्घाटन, किसानों को सरकार देगी हर मदद
