रांची का ‘विवेकानंद पार्क’ बना खंडहर, शाम होते ही सजती है असामाजिक तत्वों की महफिल

Ranchi Municipal Corporation: रांची के लालपुर स्थित स्वामी विवेकानंद स्मृति पार्क देखरेख के अभाव में खंडहर बन चुका है. 3 करोड़ की लागत से बना यह पार्क अब असामाजिक तत्वों का अड्डा बन गया है, वहीं जाकिर हुसैन पार्क में भी आम लोगों की एंट्री बंद है. नगर निगम की इस बेरुखी पर पढ़ें ग्राउंड रिपोर्ट.

Ranchi Municipal Corporation, रांची (उत्तम महतो की रिपोर्ट): झारखंड की राजधानी रांची में जनसुविधाओं और पार्कों के रखरखाव को लेकर नगर निगम की बड़ी लापरवाही सामने आई है. लालपुर डिस्टिलरी पुल के समीप स्थित स्वामी विवेकानंद स्मृति पार्क आज प्रशासनिक देखरेख के अभाव में पूरी तरह खंडहर में तब्दील होता जा रहा है. पार्क के भीतर जगह-जगह टूटे हुए रास्ते, टूटे-फूटे और खतरनाक हो चुके झूले, चारों तरफ उगी कंटीली झाड़ियां और फैली गंदगी यहां आने वाले लोगों को परेशान कर रही है. स्थिति इतनी बदतर हो चुकी है कि शाम ढलते ही इस पार्क में असामाजिक तत्वों का जमावड़ा लगने लगता है, जिसके कारण स्थानीय लोग और महिलाएं खुद को असुरक्षित महसूस करते हैं.

3 करोड़ की लागत पर फिरा पानी, कोकर क्षेत्र का इकलौता सहारा था पार्क

गौरतलब है कि कोकर और आसपास के घने बसे क्षेत्र में स्थानीय लोगों के लिए एक भी ओपन स्पेस (खुली जगह) नहीं होने के कारण, वर्ष 2018 में इस पार्क का भव्य उद्घाटन किया गया था. शुरुआत में यहां प्रतिदिन सुबह और शाम को बच्चों, युवाओं और बुजुर्गों की भारी भीड़ उमड़ती थी. इस पार्क के निर्माण पर नगर निगम द्वारा तीन करोड़ रुपये से अधिक की भारी-भरकम राशि खर्च की गई थी. इसे शहरवासियों के लिए एक बेहतरीन मनोरंजन स्थल के रूप में विकसित किया गया था, जहां वॉकिंग ट्रैक, बच्चों के खेलने के आधुनिक साधन, बैठने के लिए बेंच और अन्य विश्वस्तरीय सुविधाएं दी गई थीं. लेकिन आज रखरखाव के अभाव में ये सभी सुविधाएं पूरी तरह बेकार हो चुकी हैं. यहां तक कि पार्क का स्विमिंग पूल भी अब गंदे पानी और हरी काई से सड़ा जा रहा है.

Also Read: Ramgarh: 34 जंगली हाथियों को खदेड़ने में जुटी गोला और पेटरवार की क्यूआरटी टीम

तालाब को भरकर बनाया, पहली ही बारिश में खुली पोल

इस पार्क के इतिहास और इंजीनियरिंग पर भी अब गंभीर सवाल उठ रहे हैं. दरअसल, पूर्व में इस स्थान पर ऐतिहासिक डिस्टिलरी तालाब हुआ करता था. नगर निगम ने इस तालाब को पाटकर और सुखाकर इसे पार्क का रूप दे दिया. चूंकि इसका निर्माण निचले इलाके में किया गया था, इसलिए पहली ही बारिश में यह पार्क दोबारा तालाब में तब्दील हो गया. जलजमाव इस कदर हुआ कि बरसात के दिनों में लोगों का यहां पैर रखना भी दूभर हो गया. पानी जमा रहने के कारण पार्क के सारे कीमती फूल-पौधे और हरी घास सड़कर नष्ट हो गए. इस बड़ी तकनीकी चूक के बाद नगर निगम की टीम ने दोबारा इसे दुरुस्त कराने या ड्रेनेज सिस्टम ठीक करने का कोई प्रयास ही नहीं किया.

जाकिर हुसैन पार्क की भी थमी रौनक

सिर्फ विवेकानंद पार्क ही नहीं, बल्कि राजभवन के समीप स्थित शहर के एक और प्रमुख जाकिर हुसैन पार्क की स्थिति भी बेहद निराशाजनक है. इस पार्क में भी अब आम लोगों के प्रवेश पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है. रातू रोड फ्लाईओवर के निर्माण और पार्क के चारों ओर नई सड़कों का जाल बिछ जाने के कारण इसकी कनेक्टिविटी खत्म हो गई है. अब इस ऐतिहासिक पार्क में केवल ट्रैफिक पुलिस के जवान धूप और गर्मी से बचने के लिए बैठते हैं. जबकि एक दौर ऐसा भी था, जब सुबह और शाम के वक्त यहां हजारों की संख्या में रांची वासी शुद्ध हवा और मनोरंजन के लिए आया करते थे. निगम की इस बेरुखी से राजधानी के लोगों में गहरा आक्रोश है.

Also Read: राज्यपाल संतोष गंगवार ने डॉ सिमी मेहता की पुस्तक का किया विमोचन

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

Published by: Sameer oraon

इंटरनेशनल स्कूल ऑफ बिजनेस एंड मीडिया से बीबीए मीडिया में ग्रेजुएट होने के बाद साल 2019 में भारतीय जनसंचार संस्थान दिल्ली से हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा किया. 5 साल से अधिक समय से प्रभात खबर में डिजिटल पत्रकार के रूप में कार्यरत हूं. इससे पहले डेली हंट में बतौर प्रूफ रीडर एसोसिएट के रूप में काम किया. झारखंड के सभी समसामयिक मुद्दे खासकर राजनीति, लाइफ स्टाइल, हेल्थ से जुड़े विषयों पर लिखने और पढ़ने में गहरी रुचि है. तीन साल से अधिक समय से झारखंड डेस्क पर काम कर रहा हूं. फिर लंबे समय तक लाइफ स्टाइल के क्षेत्र में भी काम किया हूं. इसके अलावा स्पोर्ट्स में भी गहरी रुचि है.
और पढ़ें

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >