रांची से आनंद मोहन की रिपोर्ट
रांची : झारखंड में सार्वजनिक क्षेत्र की विभिन्न कोयला कंपनियों द्वारा पिछले पांच वर्षों के दौरान खनन परियोजनाओं के कारण विस्थापित हुए 6591 परिवारों का सफलतापूर्वक पुनर्वास किया गया है. इस अवधि में प्रभावित परिवारों को भूमि, संपत्ति और पुनर्वास मद में कुल 1108 करोड़ रुपये से अधिक की मुआवजा राशि वितरित की गई है. यह जानकारी केंद्रीय कोयला एवं खनन राज्य मंत्री सतीश चंद्र दुबे ने मंगलवार को राज्यसभा में दी. वे राज्यसभा सांसद परिमल नथवाणी द्वारा झारखंड में विस्थापन, पुनर्वास योजनाओं और मुआवजे से जुड़े पूछे गए एक सवाल का जवाब दे रहे थे. सांसद नथवाणी ने सरकार से राज्य में कोयला खनन के कारण प्रभावित परिवारों और उनके लिए चलाई जा रही कल्याणकारी योजनाओं का विस्तृत ब्योरा मांगा था.
कोल इंडिया की सहायक कंपनियों ने 1791 परिवारों को बसाया
राज्यसभा में केंद्रीय मंत्री ने कोल इंडिया लिमिटेड (CIL) की सहायक कंपनियों के योगदान की जानकारी साझा की. उन्होंने बताया कि भारत कोकिंग कोल लिमिटेड (BCCL), सेंट्रल कोलफील्ड्स लिमिटेड (CCL), ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (ECL) और एनएलसी इंडिया लिमिटेड (NLCIL) ने मिलकर कुल 1791 परियोजना प्रभावित परिवारों का पुनर्वास किया है. इन कंपनियों ने पुनर्वास, पुनर्व्यवस्था तथा भूमि और संपत्ति मुआवजे के रूप में 587 करोड़ रुपये वितरित किए हैं. रोजगार के मोर्चे पर जानकारी देते हुए बताया गया कि CCL ने 968 और ECL ने 174 पात्र प्रभावितों को नौकरियां प्रदान की हैं.
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NTPC की परियोजनाओं से 4800 परिवार विस्थापित
झारखंड में नेशनल थर्मल पावर कॉर्पोरेशन (NTPC) की कोयला खदानों का ब्योरा देते हुए केंद्रीय मंत्री ने बताया कि पकरी-बरवाडीह, चट्टी-बरियातू और केरंदरी कोयला खनन गतिविधियों के कारण कुल 4,800 परिवार विस्थापित हुए. एनटीपीसी द्वारा संचालित इन परियोजनाओं के प्रभावितों के बीच कुल 520.80 करोड़ रुपये की मुआवजा राशि वितरित की जा चुकी है. इसके अलावा पचवारा साउथ ओपन कास्ट प्रोजेक्ट और NLCIL ने 86 परियोजना प्रभावित परिवारों को आवास के बदले आर्थिक मुआवजा दिया है, जबकि पांच प्रभावित परिवारों को रोजगार के विकल्प के रूप में एकमुश्त मुआवजा प्रदान किया गया है.
समयबद्ध समाधान के लिए नियमित समीक्षा और प्रभावी निगरानी
केंद्रीय राज्य मंत्री सतीश चंद्र दुबे ने सदन को आश्वस्त किया कि विस्थापन और पुनर्वास से जुड़े सभी मामलों पर केस-टू-केस (मामला-दर-मामला) के आधार पर त्वरित कार्रवाई की जा रही है. पुनर्वास संबंधी समस्याओं और लंबित मुद्दों के समयबद्ध समाधान के लिए शीर्ष स्तर पर नियमित समीक्षा बैठकें आयोजित की जाती हैं. केंद्र सरकार राज्य में विस्थापितों के पुनर्वास और पुनर्व्यवस्था नीति को पारदर्शी और प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है.
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