Ranchi news : विस्थापन आयोग का सुझाव मानने के लिए बाध्य नहीं होगी सरकार

सर्वेक्षण के माध्यम से आंकड़ा जुटायेगा आयोग, अनुसंधान और योजना बनाने में करेगा मदद.

रांची. राज्य सरकार ने विस्थापन व पुनर्वास आयोग गठित करने का फैसला कैबिनेट से पास कर दिया है. लंबे समय के बाद झारखंड में यह संभव हो पाया है. राज्य सरकार आयोग के माध्यम से जमीन अधिग्रहित क्षेत्रों में विस्थापित परिवार से जुड़े तमाम आंकड़े जुटायेगी. आयोग सामाजिक, आर्थिक व सांस्कृतिक सर्वेक्षण करेगा. राज्य सरकार को विस्थापित परिवारों के अधिकारों व हितों की रक्षा के लिए सर्वेक्षण के बाद तथ्यपरक सुझाव देगा. कैबिनेट से पारित प्रस्ताव में इस बात का भी उल्लेख है कि राज्य सरकार आयोग का सुझाव मांगने के लिए बाध्य नहीं होगी.

राजस्व, निबंधन व भूमि सुधार विभाग के अधीन काम करने वाले इस आयोग के साथ सरकार ने नियमित बैठक करने की बात कही है. लेकिन, आयोग की अनुशंसा के प्रभाव और क्रियान्वयन को लेकर सवाल जरूर उठ रहे हैं. राज्य सरकार समय-समय पर आयोग को दायित्व सौंपेगी. सरकार ने अधिग्रहण के क्षेत्र में विस्थापित परिवारों के सामाजिक-आर्थिक व अन्य सर्वेक्षण के लिए आयोग को ही प्रक्रिया निर्धारित करने की छूट दी है. आयोग के आदेश और सुझाव सचिव के हस्ताक्षर के जारी किये जा सकेंगे.

आयोग को नीतियों के क्रियान्वयन या कार्रवाई का अधिकार नहीं

आयोग के पास विस्थापन-पुनर्वास नीति के अनुपालन कराने के लिए किसी तरह का अधिकार नहीं है. वह केवल सुझाव देने वाली संस्था होगी. आयोग के सुझाव को अगर सरकार अंगीकार भी करती है, तो वह इसे लागू होने के बाद उसकी मॉनिटरिंग नहीं कर पायेगा. यह सबकुछ सरकार में निहित होगी. आयोग को किसी तरह की कार्रवाई का अधिकार नहीं है.

आयोग के अध्यक्ष व सदस्य लोकसेवक होंगे

आयोग के अध्यक्ष व सदस्य लोकसेवक होंगे. भारतीय न्याय संहित-2023 की धारा 2 (28) के तहत इनको लोकसेवक के रूप में परिभाषित किया जायेगा. सरकार इनका वेतन व भत्ता नियमावली के तहत तय करेगी. इसके साथ ही आयोग के कार्यालय व कामकाज में खर्च के लिए राशि उपलब्ध करायेगी.

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Published by: Rajiv kumar

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