Delhi Garjana Rally, रांची : नई दिल्ली के ऐतिहासिक लाल किला मैदान में आगामी दिनों में एक विशाल ‘जनजाति सांस्कृतिक समागम व गर्जना रैली’ का आयोजन होने जा रहा है. ‘जनजाति सुरक्षा मंच’ के तत्वावधान में आयोजित होने वाले इस भव्य राष्ट्रीय कार्यक्रम में झारखंड सहित देश के विभिन्न राज्यों से आदिवासी समाज के लाखों प्रतिनिधि शामिल होंगे. इस महासमागम में मुख्य अतिथि के रूप में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह शिरकत करेंगे, जबकि कार्यक्रम की अध्यक्षता जनजाति सुरक्षा मंच के राष्ट्रीय संयोजक गणेश राम करेंगे. इस समागम में मुख्य रूप से आदिवासी समाज की संस्कृति, हक-अधिकारों और सबसे संवेदनशील विषय ‘डीलिस्टिंग’ (धर्मांतरित आदिवासियों को अनुसूचित जनजाति की सूची से बाहर करना) पर देशव्यापी चर्चा होने की संभावना है.
झारखंड से विशेष ट्रेनों से रवाना होंगे 4500 लोग
जनजाति सुरक्षा मंच के वरिष्ठ पदाधिकारी मेघा उरांव ने कार्यक्रम की तैयारियों की जानकारी देते हुए बताया कि समागम की आध्यात्मिक और पारंपरिक सफलता के लिए झारखंड में 19 मई से ही विभिन्न देवी मड़ई और सरना स्थलों पर देव पूजा का आयोजन किया जा रहा है. उन्होंने बताया कि इस समागम में भाग लेने के लिए रेल मंत्रालय द्वारा विशेष ट्रेनों (Special Trains) का संचालन किया जा रहा है. झारखंड से करीब साढ़े चार हजार (4,500) आदिवासी प्रतिनिधि 22 मई को रांची से दिल्ली के लिए रवाना होंगे. ये सभी लोग अपने साथ ढोल, नगाड़ा, मांदर और ढाक जैसे पारंपरिक वाद्य यंत्रों और वेशभूषा के साथ दिल्ली की धरती पर झारखंड की सांस्कृतिक पहचान दर्ज कराएंगे.
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पूर्व मंत्री गीताश्री उरांव ने किया डिलिस्टिंग का बहिष्कार
एक तरफ जहां दिल्ली जाने की तैयारियां जोरों पर हैं, वहीं दूसरी तरफ झारखंड के कई प्रमुख आदिवासी, मूलवासी, जन संगठनों, पारंपरिक स्वशासन प्रतिनिधियों, शिक्षाविदों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने एकजुट होकर इस कार्यक्रम का पूर्ण बहिष्कार करने की अपील जारी की है. बहिष्कार करने वाले प्रतिनिधियों का स्पष्ट आरोप है कि इस समागम के पीछे की सोच पूरी तरह आदिवासी विरोधी और विभाजनकारी है. ‘डीलिस्टिंग’ के नाम पर आदिवासियों की पारंपरिक एकता को तोड़ने का प्रयास किया जा रहा है. प्रतिनिधियों ने कड़े शब्दों में कहा कि आदिवासी प्रकृति पूजक हैं और वे कभी भी सनातन का हिस्सा नहीं रहे हैं, इसलिए उनकी संस्कृति को किसी खास ढांचे में ढालने की कोशिश न की जाए.
बहिष्कार करने वाले प्रमुख चेहरे और संगठन
दिल्ली में होने वाले कार्यक्रम का पूर्व शिक्षा मंत्री गीताश्री उरांव, पूर्व विधायक मंगल सिंह बोबोंगा, देवकीनंदन बेदिया, कुमारचंद्र मार्डी, गुंजल इकिर मुंडा, डेमका सोय, रमेश जराई, रजनी मुर्मू, नीतिशा खलखो, अलोका कुजूर, कृष्णा मार्डी, बिंसाय मुंडा, प्रबल महतो, मीनाक्षी मुंडा, मुकेश बिरुआ, हरी कुमार भगत, दिनेश मुर्मू, सानिका मुंडा, ज्योत्सना तिर्की, साधु हो, सुनीता लकड़ा और जयकिशन गोडसोरा समेत कई लोग शामिल हैं.
बहिष्कार करने वाले मुख्य संगठन
कार्यक्रम का जिन लोगों ने बहिष्कार किया है उसमें अखिल भारतीय आदिवासी विकास समिति, गांव गणराज्य परिषद, सरना संगोम समिति, आदिवासी मुंडा समाज महासंघ, आदिवासी संघर्ष मोर्चा, आदिवासी मूलवासी अधिकार मंच (बोकारो), भारत जकत माझी परगना महल (रामगढ़), पारंपरिक ग्राम सभा (खूंटी), आदिवासी क्षेत्र सुरक्षा परिषद, आतू सुसर समिति, संयुक्त ग्राम सभा, युवा झुमुर, आदिवासी पाहन बाबा सेवा समिति, हो लेखक संघ, आदिवासी समन्वय समिति, ग्राम प्रधान संघ, झारखंड जनाधिकार महासभा, जोहार और ओमोन महिला संगठन समेत कई अन्य सामाजिक संगठन शामिल है.
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