रांची से मनोज सिंह की रिपोर्ट
Deepika Pandey Singh, रांची : झारखंड के अधिकारियों को सिर्फ दिमाग से ही नहीं, बल्कि दिल से भी सोचने एवं काम करने की जरूरत है. नंगे पांव अपना काम कराने की उम्मीद लेकर सरकारी दफ्तर पहुंचने वाले लोगों के दर्द को समझना होगा. वे कार्यालय से खाली हाथ न लौटें, यह सुनिश्चित करना राज्य के हर अधिकारी की नैतिक जिम्मेदारी है.” ये बातें राज्य की ग्रामीण विकास मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने सोमवार को रांची के सर्ड (SIRD) सभागार में कहीं. वे वहां आयोजित ‘आई गॉट कर्मयोगी’ (iGOT Karmayogi) पोर्टल की राज्यस्तरीय कार्यशाला को मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित कर रही थीं. इस महत्वपूर्ण कार्यशाला में राज्य भर के उप समाहर्ता सह प्रखंड विकास पदाधिकारियों (BDO) ने भाग लिया.
प्रखंड और अंचल कार्यालय ही सरकार का असली चेहरा: दीपिका पांडेय सिंह
मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने कार्यशाला में अधिकारियों को उनकी मूल जिम्मेदारी याद दिलाते हुए कहा कि अधिकारी आम जनता के लिए कैसे सहजता और सरलता से उपलब्ध रहें, इसे हर हाल में सुनिश्चित करना होगा. उन्होंने जोर देकर कहा कि प्रखंड (ब्लॉक) और अंचल (अंचल) कार्यालय ही धरातल पर सरकार का असली चेहरा होते हैं. सरकार की तमाम महत्वाकांक्षी व कल्याणकारी योजनाओं को जमीन पर उतारने और उन्हें पूरी तरह सफल बनाने में इन अधिकारियों की सबसे बड़ी भूमिका है. अधिकारियों के ईमानदार और बेहतर प्रयासों से ही समाज के अंतिम पायदान पर खड़े लाभुकों तक योजनाओं का सीधा लाभ पहुंच पा रहा है.
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मिशन कर्मयोगी मौजूदा समय की मांग: दीपिका पांडेय सिंह
बदलते दौर का जिक्र करते हुए ग्रामीण विकास मंत्री ने ‘मिशन कर्मयोगी’ को समय की मांग बताया और कहा कि यह अधिकारियों की कार्यक्षमता के विकास में बेहद मददगार साबित हो रहा है. सरकार के विजन को धरातल पर सच करने के लिए नए इनोवेशन (Innovations) के साथ कदमताल करना अनिवार्य है. उन्होंने कहा कि सीखने की कोई उम्र सीमा नहीं होती, इसलिए समय के साथ खुद को अपग्रेड और प्रशिक्षित करने से सरकारी काम की रफ्तार काफी बढ़ेगी. आज झारखंड में परिस्थितियां तेजी से बदली हैं; अब लोग राशन और पेंशन जैसी बुनियादी चीजों के लिए दर-दर भटकने को विवश नहीं हैं, लेकिन वे सरकार की अन्य कल्याणकारी योजनाओं का लाभ लेने की इच्छा जरूर रखते हैं. ऐसे में योग्य लाभुकों को समय सीमा के भीतर योजनाओं का लाभ दिलाना अधिकारियों की सीधी जवाबदेही है.
काम को आसान बनाने और AI का उपयोग करने की सलाह
कार्यशाला को संबोधित करते हुए सर्ड (SIRD) के निदेशक राजेश कुमार ने कहा कि यह आयोजन महज एक कार्यशाला या प्रशिक्षण नहीं है, बल्कि यह समय की बचत करने और विभागीय काम को अधिक आसान बनाने का एक बेहतरीन अवसर है. अधिकारी जितना अधिक जनता से सीधा संवाद करेंगे और उनकी जमीनी समस्याओं को जानेंगे, उतनी ही तेजी से फाइलों का निपटारा होगा. उन्होंने विशेष रूप से अधिकारियों को सलाह दी कि वे वर्तमान तकनीक और एआई (Artificial Intelligence) के जरिये मिलने वाली नई जानकारियों व टूल्स का उपयोग अपने दैनिक शासकीय कार्यों के दौरान जरूर करें. कार्यशाला के दौरान मिशन कर्मयोगी से संबंधित तकनीकी प्रशिक्षण दिया गया और अधिकारियों के विभिन्न नीतिगत सवालों के जवाब प्रशिक्षक निधि द्वारा दिए गए.
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