झारखंड CUJ के दो शिक्षकों का रिसर्च पेपर अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी के लिए चयनित, श्रीलंका में होगा प्रस्तुतीकरण

केंद्रीय विश्वविद्यालय झारखंड (CUJ) के दो शिक्षकों, डॉ उपेंद्र कुमार सत्यार्थी और डॉ विभूति भूषण विश्वास, के शोध-पत्र श्रीलंका में आयोजित अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी के लिए चयनित हुए हैं. यह संगोष्ठी साहित्य, संस्कृति और विचारों पर केंद्रित होगी.


Ranchi News: केंद्रीय विश्वविद्यालय झारखंड (CUJ) के दो शिक्षकों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विश्वविद्यालय का नाम रोशन किया है. विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग के डॉ उपेंद्र कुमार सत्यार्थी और अंतरराष्ट्रीय संबंध विभाग के डॉ विभूति भूषण विश्वास के शोध-पत्र श्रीलंका के सबरगामुवा विश्वविद्यालय में आयोजित होने वाली प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी के लिए चयनित किए गए हैं. यह संगोष्ठी 25 और 26 सितंबर को आयोजित होगी, जिसमें दक्षिण एशिया के साहित्य, संस्कृति और विचार पर विभिन्न देशों के विद्वान अपने शोध प्रस्तुत करेंगे.

मार्टिन विक्रमसिंह की 50वीं स्वर्ण पुण्यस्मृति में संगोष्ठी

यह अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी श्रीलंका के प्रसिद्ध सिंहली साहित्यकार मार्टिन विक्रमसिंह की 50वीं स्वर्ण पुण्यस्मृति के अवसर पर आयोजित की जा रही है. इस आयोजन का उद्देश्य दक्षिण एशियाई साहित्यिक परंपराओं के बीच संवाद को मजबूत करना और क्षेत्रीय साहित्य की साझा विरासत को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत करना है.

प्रेमचंद और मार्टिन विक्रमसिंह के साहित्य पर फोकस

संगोष्ठी का एक प्रमुख आकर्षण सिंहली साहित्यकार मार्टिन विक्रमसिंह और हिंदी के महान कथाकार मुंशी प्रेमचंद के साहित्य पर केंद्रित विशेष विमर्श होगा. दोनों लेखकों ने अपने-अपने समाज की वास्तविकताओं, ग्रामीण जीवन, सामाजिक बदलाव और मानवीय संवेदनाओं को साहित्य के माध्यम से प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया है. आयोजकों का मानना है कि दोनों साहित्यकारों की रचनाएं दक्षिण एशियाई समाज के साझा अनुभवों और सांस्कृतिक मूल्यों को समझने का महत्वपूर्ण माध्यम हैं. इसी कारण संगोष्ठी में तुलनात्मक साहित्य के दृष्टिकोण से उनके योगदान पर विस्तृत चर्चा की जाएगी.

डॉ उपेंद्र कुमार सत्यार्थी की पुस्तक का होगा लोकार्पण

इस अवसर पर सीयूजे के हिंदी विभाग के डॉ उपेंद्र कुमार सत्यार्थी के संपादन में प्रकाशित पुस्तक "दक्षिण एशिया के महान कथाकार मार्टिन विक्रमसिंह और प्रेमचंद" का औपचारिक लोकार्पण भी किया जाएगा. यह पुस्तक दोनों साहित्यकारों के साहित्यिक योगदान, सामाजिक दृष्टि, कथा-शिल्प और दक्षिण एशियाई साहित्य में उनके प्रभाव का तुलनात्मक अध्ययन प्रस्तुत करती है. पुस्तक का लोकार्पण इस अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी का महत्वपूर्ण शैक्षणिक आकर्षण माना जा रहा है.

विश्वविद्यालय परिवार ने दी शुभकामनाएं

दोनों शिक्षकों की इस उपलब्धि पर केंद्रीय विश्वविद्यालय झारखंड के कुलपति प्रो. सारंग मेढकर ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि विश्वविद्यालय के शिक्षक लगातार राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अपनी अकादमिक उपस्थिति दर्ज करा रहे हैं, जिससे संस्थान की प्रतिष्ठा बढ़ रही है. कुलसचिव केके राव सहित विश्वविद्यालय के अन्य शिक्षकों और अधिकारियों ने भी डॉ उपेंद्र कुमार सत्यार्थी तथा डॉ विभूति भूषण विश्वास को शुभकामनाएं देते हुए उनके सफल प्रस्तुतीकरण की कामना की है.

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वैश्विक स्तर पर पहचान बना रहा सीयूजे

विश्वविद्यालय प्रशासन का मानना है कि इस तरह के अंतरराष्ट्रीय आयोजनों में सीयूजे के शिक्षकों की भागीदारी न केवल उनके व्यक्तिगत शोध कार्यों को वैश्विक पहचान दिलाती है, बल्कि विश्वविद्यालय की अकादमिक साख को भी मजबूत करती है. इससे शोध और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के नए अवसर विकसित होने की संभावना बढ़ेगी, जिसका लाभ आने वाले समय में विद्यार्थियों और शोधार्थियों को भी मिलेगा.

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लेखक के बारे में

By संजीव कुमार

संजीव कुमार सिंह, वर्तमान में प्रभात खबर, रांची में विशेष संवाददाता के पद पर कार्यरत हैं. वह 14 वर्षों (2005 से 2019) तक प्रभात खबर रांची में मुख्य संवाददाता रहे हैं. पत्रकारिता के क्षेत्र में लगभग 29 वर्षों का अनुभव है. लंबे पत्रकारिता जीवन में खोजी, विश्लेषणात्मक और जनसरोकार से जुड़े विषयों पर अनेक महत्वपूर्ण रिपोर्टें प्रकाशित की हैं. प्रभात खबर द्वारा बेस्ट रिपोर्टर का अवार्ड भी दिया गया. इनकी विशेष पहचान झारखंड के उच्च शिक्षा तंत्र, विश्वविद्यालयों, प्रतियोगी परीक्षाओं, सरकारी नियुक्तियों व प्रशासनिक व्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर गहन और तथ्यपरक रिपोर्टिंग के लिए रही है. झारखंड लोक सेवा आयोग के गठन के बाद सिविल सेवा, व्याख्याता, इंजीनियर, जैसी नियुक्तियों में गड़बड़ी को उजागर किया.

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