JPSC-JSSC परीक्षाओं में गड़बड़ी पर कांग्रेस से हस्तक्षेप की मांग, बंधु तिर्की ने सौंपे पांच अहम सुझाव

झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (जेएसएससी) की परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर कांग्रेस नेता बंधु तिर्की ने प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष को पत्र लिखा है. उन्होंने अभ्यर्थियों के हित में ठोस निर्णय के लिए मुख्यमंत्री से मुलाकात का आग्रह किया है.


रांची से अरविंद कुमार सिंह की रिपोर्ट

Ranchi News: झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (जेएसएससी) की परीक्षाओं में कथित अनियमितता, पेपर लीक और भ्रष्टाचार के मुद्दे पर कांग्रेस नेता एवं पूर्व मंत्री बंधु तिर्की ने प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष को पत्र लिखकर हस्तक्षेप की मांग की है. उन्होंने आग्रह किया है कि कांग्रेस का एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल मुख्यमंत्री से मिलकर अभ्यर्थियों के हित में ठोस निर्णय सुनिश्चित कराए. पत्र में पांच महत्वपूर्ण सुझाव भी दिए गए हैं.

अभ्यर्थियों को न्याय दिलाने की उठाई मांग

बंधु तिर्की ने पत्र में कहा है कि देशभर में पेपर लीक और भ्रष्टाचार के खिलाफ छात्र-छात्राएं लगातार आंदोलन कर रहे हैं. कांग्रेस नेता राहुल गांधी भी संसद से लेकर सड़क तक इस मुद्दे को उठा रहे हैं. झारखंड में भी जेपीएससी और जेएसएससी की परीक्षाओं को लेकर अभ्यर्थी लंबे समय से न्याय की मांग कर रहे हैं. ऐसे में सरकार का हिस्सा होने के नाते कांग्रेस की जिम्मेदारी बनती है कि वह छात्रों की आवाज को मजबूती से उठाए.

राज्य गठन के बाद हुई सभी परीक्षाओं की जांच का सुझाव

पत्र में पहला सुझाव यह दिया गया है कि राज्य गठन के बाद जेपीएससी और जेएसएससी द्वारा आयोजित अब तक की सभी परीक्षाओं की निष्पक्ष जांच कराई जाए. उनका कहना है कि इससे वर्षों से उठ रहे विवादों और अनियमितताओं पर स्पष्ट स्थिति सामने आएगी तथा दोषियों की पहचान संभव होगी.

सभी परीक्षाओं की उत्तर पुस्तिका जारी करने की मांग

दूसरे सुझाव में कहा गया है कि जेपीएससी और जेएसएससी द्वारा आयोजित सभी परीक्षाओं की उत्तर पुस्तिकाएं और श्वेत पत्र सार्वजनिक किए जाएं. इससे चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ेगी और अभ्यर्थियों का आयोगों पर भरोसा मजबूत होगा.

दोषियों पर फास्ट ट्रैक कोर्ट में चले मुकदमा

बंधु तिर्की ने तीसरे सुझाव में कहा है कि जांच के बाद जिन अधिकारियों या कर्मचारियों की संलिप्तता सामने आए, उनके खिलाफ फास्ट ट्रैक कोर्ट में मुकदमा चलाकर त्वरित सजा सुनिश्चित की जाए. उनका मानना है कि कड़ी कार्रवाई से भविष्य में ऐसी घटनाओं पर रोक लगेगी.

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परीक्षा कैलेंडर और नए कानून की भी मांग

पत्र में कहा गया है कि परीक्षा कैलेंडर का पालन नहीं होने से कई अभ्यर्थियों की आयु सीमा प्रभावित हुई है. इसलिए जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की जानी चाहिए. इसके साथ ही आवश्यकता पड़ने पर पेपर लीक, नकल, फर्जीवाड़ा और भ्रष्टाचार रोकने के लिए नया कानून बनाया जाए. हालांकि कानून बनाने से पहले सभी दलों और छात्र संगठनों से व्यापक संवाद करने की भी सलाह दी गई है, ताकि ऐसा कानून छात्रों के हितों की रक्षा कर सके और भविष्य में भर्ती परीक्षाओं की पारदर्शिता सुनिश्चित हो.

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By Kumarvishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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