रांची़ संगीत, नृत्य और कला जब ये तीनों एक साथ मिलते हैं, तो सृजित होती है एक ऐसी रचना, जो अनंत काल तक जीवंत रहती है. जीवन में सर्वांगीण विकास के लिए ज्ञान, कर्म और भक्ति प्रमुख है. ऋतु बसंत इसका जीवंत प्रतीक है. ये बातें जेवीएम श्यामली के प्राचार्य समरजीत जाना ने कहीं. वे शनिवार को प्राचीन कला केंद्र, संस्कृति मंत्रालय भारत सरकार के तत्वावधान में जेवीएम श्यामली में आयोजित बसंतोत्सव कार्यक्रम में बोल रहे थे. उन्होंने कहा कि बसंत अर्थात ””””बस-अंत”””” यानी जीवन की नकारात्मकता का अंत. कार्यक्रम का उदघाटन महिला इस्पात समिति के अध्यक्षा सोनी वर्मा ने किया. कार्यक्रम का शुभारंभ शिव स्तुति से हुआ. शास्त्रीय गायन में लिली मुखर्जी और अमृता मुखर्जी ने संयुक्त रूप से अपनी प्रस्तुति दी.
होली पर आधारित रचना से किया भावविभोर
गायिका प्रियंका मित्रा ने राग केदार से शुरुआत की और पारंपरिक आलाप के बाद एक ताल की रचना बन ठन के चली.. की प्रस्तुति दी. इसके बाद द्रुत तीन ताल में निबद्ध रचना सईआं मोरा रे मतवारी पेश की. इसके बाद प्रियंका ने एक ताल की द्रुत बंदिश चतुर बनिए प्रस्तुत दी. प्रियंका ने होली पर आधारित रचना आज फगुआ पेश की.भगवान जगन्नाथ पर आधारित नृत्य की प्रस्तुति
प्रसिद्ध नृत्यांगना सुमेधा सेनगुप्ता ने ओडिशी बटु और भगवान जगन्नाथ पर आधारित नृत्य प्रस्तुत किया. उनकी भाव-भंगिमाएं और सधे हुए पद संचालन ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया. सुप्रसिद्ध कथक नृत्यांगना नबामिता चौधरी ने घुंघरुओं की सधी हुई लयकारी से मंच पर ऐसा जादू बिखेरा कि पूरा सभागार तालियों की गूंज से भर उठा. कार्यक्रम में मेकन के वित्त निदेशक मुकेश कुमार, परियोजना निदेशक पीके दीक्षित, तकनीक निदेशक अमित राज, लिली मुखर्जी, सुब्रता डे, शक्ति सिंह राठौड़ मुख्य रूप से उपस्थित थे.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
