सीएम हेमंत ने विद्युत अधिनियम (संशोधन) विधेयक पर जतायी आपत्ति, कहा- विद्युत के नये कानून से राज्य की शक्तियों का हनन होगा

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तावित विद्युत अधिनियम (संशोधन) विधेयक पर आपत्ति जतायी है. उन्होंने कहा है कि इससे राज्य सरकार की शक्तियों का हनन होगा.

रांची : मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तावित विद्युत अधिनियम (संशोधन) विधेयक पर आपत्ति जतायी है. उन्होंने कहा है कि इससे राज्य सरकार की शक्तियों का हनन होगा. सीएम ने यह बात केंद्रीय विद्युत राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) राजकुमार सिंह के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के दौरान कही. गौरतलब हैक कि केंद्र सरकार विद्युत अधिनियम (संशोधन) विधेयक लाने जा रही है. इसे संसद में रखा जाना है. विधेयक के मसौदे पर राज्य सरकारों की भी सहमति जरूरी है.

इसी कड़ी में केंद्रीय विद्युत राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) राजकुमार सिंह ने शुक्रवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से मुख्यमंत्रियों/बिजली मंत्रियों के साथ विचार-विमर्श कर उनकी राय जानी. उन्होंने कहा कि राज्य सरकारों द्वारा दिये जाने वाले जरूरी सुझावों को विद्युत अधिनियम (संशोधन) विधेयक में शामिल किया जायेगा. इस मौके पर मुख्यमंत्री ने कहा कि विद्युत अधिनियम के मसौदे में कमजोर और पिछड़े राज्यों के साथ बिजली उपभोक्ताओं के हितों को सुरक्षित रखने की व्यवस्था सुनिश्चित हो. गौरतलब है कि 24 जून को ही मुख्यमंत्री ने आपत्तियों से संबंधित एक पत्र केंद्रीय मंत्री को भेज दिया था.

डीवीसी बिजली कटौती न करे, यह सुनिश्चित हो : मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य के सात जिलों में डीवीसी द्वारा बिजली आपूर्ति की जाती है, लेकिन बकाया होने की बात कह कर वह बार-बार कई-कई दिनों तक घंटों बिजली आपूर्ति बाधित कर दिया जाता है. उन्होंने कहा कि डीवीसी ने एक बार फिर बकाया नहीं देने पर बिजली आपूर्ति रोकने की चेतावनी दी है, जबकि वह राज्य सरकार के संसाधनों का पूरा इस्तेमाल करता है.

उन्होंने केंद्रीय मंत्री को इस बात से भी अवगत कराया कि उनकी सरकार ने इस साल मार्च माह तक का बकाया डीवीसी को दे दिया है. जो पहले का बकाया है, वह पूर्ववर्ती सरकार के कार्यकाल का है. क्योंकि 2014 में शून्य बकाया था. ऐसे में केंद्र सरकार डीवीसी को यह निर्देश दे कि वह झारखंड की बिजली नहीं काटे. राज्य सरकार बिजली लेने के एवज में उसका भुगतान निश्चित रूप से करेगी.

गरीबों को सस्ती बिजली देने के लिए सरकार प्रतिबद्ध : मुख्यमंत्री ने कहा कि झारखंड की एक बड़ी आबादी गरीबी रेखा के नीचे और ग्रामीण इलाके में रहती है. राज्य सरकार इनके घरों में सस्ती दर पर बिजली उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है. अतः विद्युत अधिनियम (संशोधन) विधेयक-2020 में क्रॉस सब्सिडी के मूल्य का निर्धारण करने की शक्ति को राज्य विद्युत नियामक आयोग (एसइआरसी) के साथ बनाये रखा जाये, ताकि घरेलू और कृषि उपभोक्ताओं के टैरिफ का निर्धारण कर सकें.

मुख्यमंत्री ने क्रॉस सब्सिडी इलेक्ट्रिसिटी रेगुलेटरी कमीशन के कार्य क्षेत्र से बाहर निकाल कर नेशनल टैरिफ पॉलिसी के माध्यम से तय करने की प्रक्रिया पर आपत्ति जताते हुए कहा कि इससे राज्य सरकारों की शक्तियों का हनन होगा. सीएम ने कहा कि वर्तमान में उपभोक्ताओं को सब्सिडी बिजली बिलों में कटौती के माध्यम से दी जाती है, जिसे जारी रखा जाना चाहिए.

एसइआरसी के केंद्रीयकरण के प्रस्ताव पर आपत्ति : मुख्यमंत्री ने स्टेट इलेक्ट्रिसिटी रेगुलेटरी कमीशन का केंद्रीयकरण किये जाने के प्रस्ताव पर आपत्ति जताते हुए कहा कि यह राज्य सरकारों के क्षेत्राधिकारों का हनन होगा. पूरे देश के लिए एक ही कमेटी का गठन करने से कोई अतिरिक्त लाभ मिलने की संभावना बहुत कम है. मौके पर मुख्य सचिव सुखदेव सिंह, अपर मुख्य सचिव एल खियांगते, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव राजीव अरुण एक्का और बिजली वितरण निगम के इडी केके वर्मा भी उपस्थित थे.

Post By : Pritish Sahay

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