सरकारी स्कूलों के बच्चों को अब साल में 22 दिन मिलेगा मड़ुआ का हलुआ, इन तीन जिलों से शुरू होगी योजना

बच्चों को पौष्टिक आहार देने की एक नई योजना शुरू हो रही है. सरकारी स्कूलों में अब मध्याह्न भोजन में मडुआ का हलुआ शामिल किया जाएगा. यह योजना रांची, खूंटी और सरायकेला-खरसावां जिलों में पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर शुरू होगी.

Govt. Scheme. कृषि, पशुपालन एवं सहकारिता मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने शुक्रवार को नेपाल हाउस स्थित सभागार में सहकारिता प्रभाग की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की. इसमें सरकारी स्कूलों के बच्चों को मड़ुआ का पौष्टिक आहार देने का निर्णय लिया गया. बैठक में सिद्धकोफेड ने प्रधानमंत्री पोषण योजना के तहत सरकारी विद्यालयों में मध्याह्न भोजन के लिए रागी (मड़ुआ) के आटे की आपूर्ति से संबंधित प्रस्ताव की जानकारी दी. प्रस्ताव के तहत साल में 22 दिन मड़ुआ का हलुआ दिया जायेगा.

बताया गया कि फिलहाल पायलट प्रोजेक्ट के तहत रांची, खूंटी और सरायकेला-खरसावां जिलों के स्कूली बच्चों को इसका लाभ दिया जायेगा. इस संबंध में शिक्षा विभाग के साथ पत्राचार किया गया है. इससे किसानों के उत्पाद मड़ुआ को सुनिश्चित बाजार मिलेगा, वहीं बच्चों को पौष्टिक आहार उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी. स्थानीय कृषि उत्पादों को सरकारी योजनाओं से जोड़ा जायेगा.

हर विधानसभा में कोल्ड स्टोरेज सेंटर बनेगा

मंत्री ने कहा कि चालू वित्तीय वर्ष के बजट में सरकार ने हर विधानसभा क्षेत्र में कोल्ड स्टोरेज-कम-मार्केटिंग सेंटर स्थापित करने की महत्वपूर्ण योजना ली गयी है. इसके लिए डीपीआर तैयार कराने की प्रक्रिया चल रही हैं, लेकिन अब तक प्राप्त डीपीआर से विभाग संतुष्ट नहीं है.

उन्होंने विभाग को निर्देश दिया कि देशभर में बेहतर लॉजिस्टिक एवं कोल्ड चेन सिस्टम विकसित करने वाली अग्रणी कंपनियों को भी कंसल्टेंसी के लिए आमंत्रित किया जाये. उनसे तकनीकी सुझाव लिये जाये, ताकि परियोजना को भविष्य की जरूरतों और आधुनिक तकनीक के अनुरूप तैयार किया जा सके.

मंत्री ने कहा कि राज्य के लगभग 20 जिलों में 5,000 मीट्रिक टन क्षमता वाले कोल्ड स्टोरेज बनाये गये हैं, लेकिन कई स्थानों पर तकनीकी रूप से पर्याप्त सक्षम नहीं है. इस कारण उनके संचालन में एफपीओ, सहकारी समितियों अथवा थर्ड पार्टी ऑपरेटरों को विभिन्न कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है.

लाह उत्पादन के लिए दिये जायेंगे पौधे

इस योजना के तहत लाभुकों को लाह उत्पादन के लिए उपयोगी पौधे उपलब्ध कराये जायेंगे. योजना में 400 सीमियालता (लाह) के पौधे, पांच कुसुम, पांच बेर तथा 20 कैलियेंड्रा /कैलोथायरस के पौधे दिए जाने का प्रावधान है.

मंत्री ने बताया कि सीमियालता के पौधे लगभग एक वर्ष में लाह उत्पादन के योग्य हो जाते हैं. योजना के तहत लगभग 20 डिसमिल भूमि पर एकीकृत खेती को बढ़ावा दिया जायेगा, जिससे किसान लाह उत्पादन के साथ अन्य कृषि गतिविधियों को भी जोड़ कर अपनी आय के स्रोतों को मजबूत कर सकेंगे.

बैठक में विभागीय सचिव अबु बक्कर सिद्दीख, निबंधक शशि रंजन, गोपाल जी तिवारी के साथ-साथ झास्कोलैम्प्स, झमकोफेड, सिद्धकोफेड, झास्कोफिश एवं झारखंड मिल्क फेडरेशन के एमडी शामिल थे.

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By Prabhat khabar news desk

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