Jharkhand News: मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन बोले, किसानों को कृषक पाठशाला में वैकल्पिक खेती की दें ट्रेनिंग

Jharkhand News: झारखंड के सीएम हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में सिद्धो-कान्हू कृषि एवं वनोपज राज्य सहकारी संघ (सिद्धकोफेड) के निदेशक पर्षद की तीसरी बैठक हुई. मुख्यमंत्री ने कहा कि किसानों को वैकल्पिक कृषि और वनोपज के लिए प्रशिक्षण देने की व्यवस्था करें.

Jharkhand News: रांची-मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में मंगलवार को सिद्धो-कान्हू कृषि एवं वनोपज राज्य सहकारी संघ लिमिटेड के निदेशक पर्षद की तीसरी बैठक हुई. सीएम ने कहा कि झारखंड में कृषि एवं वनोपज क्षेत्र में काफी संभावनाएं हैं. इसे बढ़ावा देने के लिए सिद्धो-कान्हू कृषि एवं वनोपज राज्य सहकारी संघ लिमिटेड का गठन हुआ है. सहकारी संघ की जानकारी किसानों तक पहुंचनी चाहिए, ताकि वे इससे जुड़कर उत्पादों का लाभ ले सकें. कृषक पाठशाला में वैकल्पिक खेती के लिए किसानों को ट्रेनिंग दें, ताकि विपरीत हालात में भी खेती से जुड़कर वे आर्थिक रूप से मजबूत बने रहें.

वैकल्पिक खेती के लिए किसानों को करें प्रशिक्षित

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि आज जिस तरह मौसम में उतार चढ़ाव देखने को मिल रहा है, उसे परंपरागत कृषि काफी प्रभावित हो रही है. ऐसे में किसानों को वैकल्पिक कृषि के लिए भी तैयार रहना होगा. उन्होंने कहा कि कृषक पाठशाला राज्य सरकार की एक महत्वपूर्ण योजना है. इस कृषक पाठशाला में किसानों को वैकल्पिक खेती का प्रशिक्षण दें. उन्हें वनोपज से जोड़ें. इसके लिए उन्हें संसाधन भी उपलब्ध कराने की पहल करें ताकि विपरीत परिस्थितियों में वे कृषि कार्य से जुड़कर अपने को मजबूत बनाए रख सकें.

सभी लैम्प्स-पैक्स को करें क्रियाशील

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने राज्यभर में अवस्थित सभी लैम्प्स-पैक्स को पूरी तरह क्रियाशील करने का निर्देश अधिकारियों को दिया, ताकि किसानों को इसका ज्यादा से ज्यादा फायदा मिल सके. उन्होंने कहा कि लैम्प्स और पैक्स से आज भी किसानों की एक बड़ी संख्या निबंधित नहीं है. ऐसे में छूटे हुए सभी किसानों को जोड़ने की पहल करें. लैम्प्स-पैक्स भवनों की मरम्मत के साथ उसके उचित रखरखाव और बेहतर प्रबंधन की पुख्ता व्यवस्था हो.

कृषि एवं वनोपज उत्पादों का वैल्यू एडिशन के साथ जियो टैगिंग हो

झारखंड में लाह, इमली, कोदो, कुटकी, सरगुजा, चिरौंजी, आंवला, महुआ, करंज, रेशम और तसर जैसे कई वनोपज हैं, जिसकी उपयोगिता और बाजार में काफी ज्यादा मांग है, लेकिन इसके उत्पादकों को इसका उचित फायदा नहीं मिल रहा है. उन्होंने कहा कि झारखंड के इन विशेष उत्पादों का वैल्यू एडिशन के साथ जियो टैगिंग करने की दिशा में कदम उठाएं, ताकि इन वनोपजों को बाजार उपलब्ध कराने के साथ किसानों को पूरा फायदा मिल सके. इससे झारखंड के इन विशिष्ट उत्पादों को वैश्विक बाजार में भी अलग पहचान मिलेगी.

मधु संग्राहकों को उचित प्रशिक्षण दिया जाए

मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि मधु संग्राहकों को उचित प्रशिक्षण दिया जाए. उनका समूह बना कर सिद्धोफेड से जोड़ा जाए एवं उनके मधु को वैश्विक बाजार उपलब्ध करने के लिए अमूल, सफोला, हिमालय जैसी बड़ी कंपनियों/ संस्थाओं से MOU किया जाए ताकि मधु संग्राहकों को उचित मूल्य मिल सके एवं लोगों को उच्च गुणवत्ता युक्त स्वास्थ्यवर्धक मधु उपलब्ध हो सके.

बैठक में ये थे उपस्थित

कृषि मंत्री दीपिका पांडेय सिंह, मुख्यमंत्री के अपर मुख्य सचिव अविनाश कुमार, वन पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग की प्रधान सचिव वंदना दादेल, कृषि सचिव अबु बकर सिद्दीक, अनुसूचित जनजाति, अनुसूचित जाति, अल्पसंख्यक एवं पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग सचिव कृपानंद झा, सिद्धो-कान्हू कृषि एवं वनोपज राज्य सहकारी संघ के निदेशक सह मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी उमाशंकर सिंह, जेएसएलपीएस के मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी संदीप सिंह एवं एपीसीसीएफ सह प्रबंध निदेशक जेएसएफडीसी वाईके दास बैठक में उपस्थित थे.

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लेखक के बारे में

By Guru Swarup Mishra

मैं गुरुस्वरूप मिश्रा. फिलवक्त डिजिटल मीडिया में कार्यरत. वर्ष 2008 से इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से पत्रकारिता की शुरुआत. आकाशवाणी रांची में आकस्मिक समाचार वाचक रहा. प्रिंट मीडिया (हिन्दुस्तान और पंचायतनामा) में फील्ड रिपोर्टिंग की. दैनिक भास्कर के लिए फ्रीलांसिंग. पत्रकारिता में डेढ़ दशक से अधिक का अनुभव. रांची विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में एमए. 2020 और 2022 में लाडली मीडिया अवार्ड.

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