सरकार ने छात्रों को धोखा दिया, JPSC-JSSC में CBI जांच से बचने के लिए परीक्षा रद्द की : चंपाई सोरेन

झारखंड के पूर्व सीएम चंपाई सोरेन ने राज्य सरकार पर छात्रों के साथ धोखा करने और JPSC-JSSC भर्ती मामलों में CBI जांच से बचने के लिए परीक्षा रद्द करने का आरोप लगाया है. उन्होंने छात्रों पर हुए लाठीचार्ज की निंदा की और इसे तानाशाही करार दिया.


रांची से अरविंद कुमार सिंह की रिपोर्ट

Ranchi News: झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा नेता चंपाई सोरेन ने राज्य सरकार पर छात्रों के साथ धोखा करने और JPSC-JSSC भर्ती मामलों में CBI जांच से बचने के लिए परीक्षा रद्द करने का आरोप लगाया है. उन्होंने कहा कि झारखंड आंदोलन के बाद यह राज्य का सबसे बड़ा छात्र आंदोलन था, लेकिन सरकार ने उनकी मूल मांग को नजरअंदाज कर दिया. उन्होंने शुक्रवार को छात्रों पर हुए लाठीचार्ज की भी कड़ी निंदा करते हुए इसे तानाशाही करार दिया.

सात साल में हर नियुक्ति प्रक्रिया पर उठे सवाल

चंपाई सोरेन ने कहा कि राज्य में गठबंधन सरकार पिछले सात वर्षों से सत्ता में है, लेकिन इस दौरान एक भी नियुक्ति प्रक्रिया ऐसी नहीं रही जिस पर सवाल न उठे हों. उन्होंने कहा कि छात्र केवल JPSC और JSSC में हुई कथित विसंगतियों की CBI जांच की मांग कर रहे थे, लेकिन सरकार ने लंबे आंदोलन के बाद भी उनकी बात नहीं मानी.

सरकार ने आंदोलन खत्म करने के लिए चालाकी की

पूर्व मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि जिस दिन परीक्षा रद्द करने की घोषणा हुई, उसी दिन करीब साढ़े चार घंटे तक कैबिनेट की बैठक चली. उनके मुताबिक सरकार ने पहले JPSC के अध्यक्ष और सदस्यों से इस्तीफा दिलवाया, फिर कई लोगों को जेल भेजा. उन्होंने कहा कि अगर गड़बड़ी नहीं हुई थी तो कार्रवाई क्यों हुई. उन्होंने कहा कि अखबारों में लगातार भर्ती प्रक्रिया में पैसे लेकर नौकरी बेचने की खबरें सामने आती रहीं. जिन लोगों को गिरफ्तार किया गया, उनके बयान भी सार्वजनिक हुए. इसके बावजूद सरकार अब मामले को कमजोर करने और तथ्यों को छिपाने की कोशिश कर रही है.

JPSC में ताला लग गया, दस्तावेज कौन देगा

चंपाई सोरेन ने कहा कि JPSC एक संवैधानिक संस्था है और उसके अध्यक्ष व सदस्यों की नियुक्ति सरकार करती है. उन्होंने आरोप लगाया कि अब आयोग लगभग खाली हो गया है और ऐसे में भर्ती घोटाले से जुड़े दस्तावेज कौन उपलब्ध कराएगा, यह बड़ा सवाल है.

प्रशासनिक प्रक्रिया के तहत होती है परीक्षा रद्द

उन्होंने कहा कि किसी परीक्षा को रद्द करने की एक तय प्रशासनिक प्रक्रिया होती है. पहले आयोग से दस्तावेज लिए जाते हैं, फिर संबंधित विभाग अपनी टिप्पणी देता है, उसके बाद मामला कैबिनेट में विचार के लिए जाता है. उनका दावा है कि इस मामले में यह पूरी प्रक्रिया नहीं अपनाई गई.

छात्रों पर लाठीचार्ज की कड़ी निंदा

चंपाई सोरेन ने हालिया छात्र आंदोलन का जिक्र करते हुए कहा कि जब हाईकोर्ट ने परीक्षा रद्द करने के फैसले पर रोक लगाई, तब छात्रों ने 24 जिलों में पुतला दहन का कार्यक्रम रखा था. उनका आरोप है कि सरकार ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर लाठीचार्ज कराया. उन्होंने कहा कि छात्र पूरे आंदोलन के दौरान अनुशासित रहे और किसी राजनीतिक दल का झंडा लेकर नहीं आए. सरकार उन्हें भाजपा समर्थक बताकर अपनी जिम्मेदारी से बचने की कोशिश कर रही है. उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पुलिस से ज्यादा सत्ता पक्ष के नेताओं ने छात्रों के साथ दुर्व्यवहार किया. उनके मुताबिक सरकार चाहती थी कि आंदोलन हिंसक हो जाए, लेकिन छात्रों ने संयम बनाए रखा.

CGL पेपर में 120 सवाल मिलने का दावा

चंपाई सोरेन ने JSSC-CGL परीक्षा को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए. उन्होंने कहा कि 135 में से 120 प्रश्न पहले से मेल खाने की जानकारी CID तक पहुंच चुकी थी, लेकिन इसके बावजूद लीपापोती की गई. उन्होंने कहा कि छात्रों की मांग केवल पारदर्शी जांच और भविष्य में निष्पक्ष भर्ती व्यवस्था सुनिश्चित करने की थी. उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के उस सिद्धांत का भी हवाला दिया कि यदि पूरे सिस्टम में गंभीर गड़बड़ी हो तो पूरी प्रक्रिया को नए सिरे से देखने की जरूरत पड़ती है.

SIT बनाने का किया दावा

पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि जब वह खुद मुख्यमंत्री थे, तब उन्हें भी JPSC में गड़बड़ी की जानकारी मिली थी. इसी कारण उन्होंने SIT का गठन कराया था. उनका आरोप है कि वर्तमान सरकार भ्रष्टाचार के मामलों को दबाने की कोशिश कर रही है. उन्होंने कहा कि झारखंड जिस उद्देश्य से अलग राज्य बना था, वर्तमान सरकार उस रास्ते से भटक चुकी है. उन्होंने 15 सितंबर तक सरकार की मंशा स्पष्ट करने की चुनौती देते हुए कहा कि यदि निष्पक्ष जांच नहीं हुई तो जनता इसका जवाब देगी.

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छात्रों के साथ खड़े रहने का किया ऐलान

चंपाई सोरेन ने कहा कि छात्रों के साथ जो हुआ, वह झारखंड का अपमान है. उन्होंने छात्रों को न्याय दिलाने के लिए नैतिक समर्थन देने की अपील की और कहा कि सभी भर्ती विसंगतियों की CBI जांच होनी चाहिए. उन्होंने कहा कि राज्य में भ्रष्टाचार चरम पर है और मौजूदा शासन व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं. उनके शब्दों में, "ऐसी स्थिति में राज्य को विकल्प की जरूरत है."

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लेखक के बारे में

By कुमार विश्वत सेन

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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