रांची: करीब छह साल से लापता 14 वर्षीय नाबालिग की तलाश अब केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) करेगा. झारखंड हाईकोर्ट ने मामले की जटिलता, अंतरराज्यीय स्तर पर मिले सुराग, डिजिटल ट्रेल और उन्नत तकनीकी संसाधनों की जरूरत को देखते हुए जांच CBI को सौंपने का आदेश दिया है. कोर्ट ने स्पष्ट किया कि मामले में उसका मुख्य उद्देश्य लापता बच्ची का पता लगाना है.
मामले की सुनवाई गुरुवार को जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद और जस्टिस संजय प्रसाद की खंडपीठ में हुई. कोर्ट ने CID के एडीजी को मामले से जुड़े पूरे रिकॉर्ड तत्काल CBI के रांची स्थित ईस्टर्न जोन के संयुक्त निदेशक को सौंपने का निर्देश दिया है. साथ ही CBI निदेशक को जांच की उचित निगरानी और नियमित समीक्षा सुनिश्चित करने को कहा गया है.
कोर्ट ने CBI को 27 अक्टूबर तक हलफनामा दाखिल कर जांच में हुई प्रगति से अवगत कराने का निर्देश दिया है. मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए हाईकोर्ट ने संबंधित लोगों को मीडिया में इंटरव्यू देकर मामले को प्रचारित नहीं करने की भी सलाह दी है.
दिल्ली, तेलंगाना और बंगाल तक मिले डिजिटल सुराग
राज्य सरकार की ओर से हाईकोर्ट में दाखिल हलफनामे में बताया गया कि जांच के दौरान बच्ची के मामले में अंतरराज्यीय और अंतरसीमा तस्करी की आशंका सामने आयी है. जांच में IP गतिविधियों से जुड़े सुराग दिल्ली, तेलंगाना और पश्चिम बंगाल तक मिले हैं.
सरकार ने कोर्ट को बताया कि वर्ष 2020 से अब तक के डिजिटल रिकॉर्ड बच्ची और मामले में शामिल आरोपियों का पता लगाने के लिहाज से महत्वपूर्ण हो सकते हैं. रिकॉर्ड नष्ट होने या स्थायी रूप से मिट जाने की स्थिति में बच्ची की तलाश और जांच दोनों प्रभावित हो सकती हैं.
जांच के दौरान Meta Platforms और Google समेत विदेशी कंपनियों से डिजिटल जानकारी हासिल करने की जरूरत भी सामने आयी है. इसके लिए MLAT या अन्य उपयुक्त कानूनी माध्यमों से विदेश स्थित कंपनियों से डेटा प्राप्त करना पड़ सकता है.
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झारखंड में नहीं है उन्नत गेट एनालिसिस की सुविधा
मामले की जांच CBI को सौंपने के पीछे तकनीकी संसाधनों की कमी भी एक प्रमुख कारण बनी. राज्य सरकार ने कोर्ट को बताया कि Gate Analysis Technology जैसे उन्नत वैज्ञानिक जांच संसाधन फिलहाल झारखंड में उपलब्ध नहीं हैं.
CID की SIT ने भी 2 जुलाई को कोर्ट के समक्ष इस तकनीकी कमी को स्वीकार किया था. राज्य के अनुसार CBI के पास अधिक उन्नत फोरेंसिक और तकनीकी संसाधन उपलब्ध हैं, जिससे मामले की जांच को आगे बढ़ाने में मदद मिल सकती है.
राज्य ने यह भी बताया कि अंतरराज्यीय और अंतरराष्ट्रीय डिजिटल पहलुओं के कारण डेटा तक पहुंच, तकनीकी संसाधनों और अधिकार क्षेत्र से जुड़ी जरूरतें सामने आ रही हैं. इन मामलों में केंद्रीय एजेंसी के स्तर पर जांच ज्यादा प्रभावी ढंग से आगे बढ़ सकती है.
दो जुलाई से CBI जांच को लेकर बनी थी सहमति
मामले में 2 जुलाई को राज्य के महाधिवक्ता ने राज्य की तकनीकी सीमाओं को स्वीकार करते हुए CBI को जांच में शामिल करने पर सहमति जतायी थी. इसके बाद CBI निदेशक को मामले में पक्षकार बनाया गया. उस समय CBI को CID के साथ मिलकर काम करने और सहयोग करने को कहा गया था.
13 अगस्त को राज्य के महाधिवक्ता रोहितश्य रॉय ने सरकार के निर्देश पर हाईकोर्ट को बताया था कि जांच CBI को सौंपे जाने पर राज्य को कोई आपत्ति नहीं है. हालांकि, हाईकोर्ट ने राज्य से इस संबंध में बाकायदा हलफनामा मांगा था. 17 अगस्त को राज्य ने हलफनामा दाखिल किया.
20 अगस्त की सुनवाई में महाधिवक्ता ने राज्य का रुख दोहराया. वहीं, CBI की ओर से पेश एएसजीआइ प्रशांत पल्लव ने भी कहा कि जांच CBI को सौंपे जाने पर एजेंसी को कोई आपत्ति नहीं है.
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क्या है पूरा मामला
करीब 14 वर्षीय बच्ची 16 अक्टूबर 2020 को सुबह लगभग 10:45 बजे लापता हुई थी. उसी दिन थाने में प्राथमिकी दर्ज करायी गयी थी. जिला पुलिस ने मामले की जांच की, लेकिन बच्ची का पता लगाने में अपेक्षित सफलता नहीं मिली.
इसके बाद हाईकोर्ट में रिट याचिका दायर की गयी. राज्य सरकार ने कोर्ट को बताया कि 20 अप्रैल 2026 को मामले की जांच CID को सौंप दी गयी थी. CID ने SIT गठित कर जांच आगे बढ़ायी, लेकिन बच्ची का पता लगाने में ठोस सफलता नहीं मिली.
अब हाईकोर्ट के आदेश के बाद CBI मामले की जांच करेगी. एजेंसी को जांच की प्रगति की रिपोर्ट 27 अक्टूबर तक हाईकोर्ट के समक्ष हलफनामे के माध्यम से पेश करनी होगी.
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