रांचीः कैथोलिक बिशप्स कॉन्फ्रेंस ऑफ इंडिया (सीबीसीआइ) के प्रेसिडेंट कार्डिनल एंथनी पूला ने केंद्र सरकार से एफसीआरए संशोधन बिल वापस लेने की अपील की है. उन्होंने कहा कि इसके प्रावधान वास्तविक चैरिटेबल संस्थाओं के लिए भारत के लोगों की मानवीय सेवा जारी रखने में गंभीर बाधा बन सकते हैं.
सीबीसीआइ की ओर से इससे पहले भी कई मौकों पर एफसीआरए संशोधन बिल को लेकर चिंता जताई जा चुकी है. देश के लिए ईसाई समुदाय के योगदान का उल्लेख करते हुए कार्डिनल पूला ने कहा कि ईसाइयों ने पीढ़ियों से शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा, समाज सेवा और मानवीय सहायता के माध्यम से भारत की सेवा की है. खासकर गरीब और कमजोर वर्गों के बीच समुदाय ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है.
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सच्ची आजादी में हर वर्ग का सम्मान जरूरी
कार्डिनल पूला ने कहा कि सच्ची आजादी का अर्थ मानवता, न्याय, समानता और गरीबों, हाशिए पर रहने वाले तथा दबे-कुचले लोगों का उत्थान है. उन्होंने देश के अलग-अलग हिस्सों में ईसाई समुदाय के लोगों के साथ हिंसा, अत्याचार, डराने-धमकाने और मॉब लिंचिंग की घटनाओं पर भी चिंता जताई.
उन्होंने कहा कि देश की ताकत इस बात में नहीं है कि कौन सा धर्म बड़ा है, बल्कि हर इंसान के सम्मान को बनाए रखने और ऐसा समाज बनाने में है, जहां कोई पीछे न छूटे. कार्डिनल पूला ने कहा कि हर नागरिक को बिना किसी डर के जीने, पूजा करने और सेवा करने का अधिकार है. उन्होंने सरकार और सभी अधिकारियों से संवैधानिक आजादी की रक्षा करने तथा जहां भी इसका उल्लंघन हो, वहां न्याय सुनिश्चित करने की अपील की.
