योगदा सत्संग आश्रम में प्रवचन
रांची. योगदा सत्संग आश्रम में ब्रह्मचारी भास्करानंद ने कहा कि बिना अंतर्मुखी हुए आप ईश्वर को न तो पा सकते हैं और न ही सांसारिक कष्टों से मुक्ति पा सकते हैं. हर व्यक्ति को चाहिए कि वह मन को बार-बार ये याद दिलाएं कि वो हरदम जागृत है. आध्यात्मिक पथ पर चलकर अध्यात्म की उच्च कोटि की अवस्था तक पहुंचने वाला आध्यात्मिक व्यक्ति जब तक हरदम जागृत व तैयार नहीं रहेगा, वो अध्यात्म के उच्च कोटि की अवस्था को प्राप्त नहीं कर सकता. उन्होंने कहा कि दो दिन पहले हमलोगों ने स्वतंत्रता दिवस मनाया. क्या इस श्रवणालय में उपस्थित योगदा भक्त बता सकते हैं कि स्वतंत्रता क्या है. दरअसल हम बाह्यरूप से स्वयं को स्वतंत्र मानते हैं, लेकिन क्या सही मायनों में हम आंतरिक रूप से स्वतंत्र हैं. क्या ये सही नहीं कि हम आज भी अपनी आदतों के दास बने हुए हैं और अपनी आदतों का दास बनकर जीवन व्यतीत करना, ये तो स्वतंत्रता नहीं. उन्होंने कहा कि हम सभी को जानना चाहिए कि हमारी आत्मा ईश्वर के स्वरूप में बनी है. आत्मा का मूल स्वरूप सच्चिदानंद हैं. जब हमें इसका ज्ञान हो जाता है तभी ईश्वर हमारे पास गुरु भेज देते हैं और फिर हम उस गुरु के माध्यम से ईश्वर को प्राप्त कर लेते हैं. उन्होंने कहा कि किसी भी महापुरुष का जन्मदिन, विशेष दिन, विशेष स्पंदन लेकर आता है. उन्होंने कहा कि बहुत लोगों को लगता है कि वे दुनिया को बदल देंगे, लेकिन उन्हें ये नहीं पता कि बदलना किसे हैं. आप जैसे ही ये जान लेते है कि बदलना किसे हैं. आप की सारी समस्याएं ही दूर हो जाती है. क्योंकि अंततः बदलना किसी दूसरे को नहीं, बल्कि अपने आपको है.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
