लातेहार के स्कूल में यौन शोषण मामले में सरकार पर भाजपा का हमला, कहा- अफसर करेंगे कोर्ट का काम?

BJP on Latehar School Misdeed Case: ओडिशा में छात्रा की आत्महत्या के बाद अब झारखंड में भी छात्राओं के यौन शोषण का मुद्दा गरमा गया है. भाजपा ने लातेहार स्कूल में हुए यौन शोषण का मुद्दा उठाते आरोप लगाया कि बड़े अधिकारी मामले को दबाने और उसकी लीपापोती करने की कोशिश कर रहे हैं. उन्होंने आरोप लगाया है कि पोस्को कोर्ट की गाइडलाइंस का उल्लंघन हो रहा है. दोषी को बचाने की कोशिश हो रही है.

BJP on Latehar School Misdeed Case: ओडिशा में एक छात्रा के आत्मदाह करने के मुद्दे पर देश भर में चल रही राजनीति के बीच भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने झारखंड के लातेहार जिले में यौन अपराध के मामले पर राज्य सरकार को घेरा. लातेहार जिले के एक स्कूल में सामूहिक दुष्कर्म का मामला उठाते हुए भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता अजय साह ने रविवार को सरकार पर तीखा हमला बोला.

  • हाईकोर्ट के ‘जुवेनाइल जस्टिस कम पोक्सो कमेटी’ की निगरानी में हो जांच
  • दोषी पदाधिकारियों पर पोक्सो एक्ट की धारा 21 के तहत हो मामला दर्ज

BJP: मामले को दबाने का प्रयास कर रहे शिक्षा सचिव और जिला प्रशासन

प्रदेश भाजपा कार्यालय में प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए अजय साह ने कहा कि झारखंड के वरिष्ठ पदाधिकारी, विशेष रूप से शिक्षा सचिव और जिला प्रशासन, पूरे प्रकरण को दबाने और लीपापोती करने का प्रयास कर रहे हैं. उन्होंने हाईकोर्ट के ‘जुवेनाइल जस्टिस कम पोक्सो कमेटी’ की निगरानी में जांच की मांग की है.

‘पोक्सो एक्ट का झारखंड में नहीं हो रहा है पालन’

अजय साह ने कहा कि पोक्सो एक्ट की धारा 19 और 21 के अनुसार, यदि किसी नाबालिग से यौन अपराध की जानकारी किसी को भी होती है, तो उसे लिखित रूप में पुलिस को सूचित करना अनिवार्य है. पुलिस को 24 घंटे के भीतर मामले को सीडब्ल्यूसी (चाइल्ड वेलफेयर कमेटी) और पोक्सो कोर्ट में दर्ज कराना होता है.

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‘पुलिस को सूचना नहीं देने वालों पर दर्ज हो केस’

भाजपा प्रवक्ता ने सुप्रीम कोर्ट के ‘शंकर किसनराव खाडे बनाम महाराष्ट्र राज्य’ मामले का हवाला देते हुए कहा कि यदि यौन हिंसा की जानकारी होने के बावजूद लिखित सूचना नहीं दी जाती है, तो संबंधित व्यक्ति पर पोक्सो एक्ट की धारा 21 के तहत आपराधिक मामला बनता है.

‘ऑडियो में कह रहीं छात्राएं- 2 साल से हो रहा यौन अपराध’

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान अजय साह ने मीडियाकर्मियों को एक ऑडियो क्लिप भी सुनाया, जिसमें छात्राओं ने आरोप लगाये हैं कि स्कूल के एक फादर पिछले 2 वर्षों से यौन अपराध कर रहे हैं. वह भी एक से अधिक छात्राओं के साथ. इसके बावजूद अब तक पोक्सो एक्ट के तहत मामला दर्ज नहीं किया गया है, जो कानून की खुली अवहेलना है.

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किस कानून के तहत शिक्षा सचिव को मिला जांच का अधिकार? – भाजपा

भाजपा प्रवक्ता ने सवाल किया कि क्या अब झारखंड में पोक्सो कोर्ट का काम भी अधिकारी करेंगे? पोक्सो एक्ट की किस धारा के तहत शिक्षा सचिव या अन्य अफसर जांच और निर्णय का अधिकार रखते हैं? क्यों एक सप्ताह बीत जाने के बाद भी पोक्सो कोर्ट में मामला दर्ज नहीं हुआ?

‘गंभीर यौन हिंसा का मामला, पोक्सो एक्ट के तहत दर्ज हो केस’

अजय साह ने मांग की है कि इस गंभीर यौन हिंसा के मामले में तत्काल पोक्सो एक्ट के तहत एफआईआर दर्ज की जाये. इसके अलावा झारखंड हाईकोर्ट के ‘जुवेनाइल जस्टिस कम पोक्सो कमेटी’ की निगरानी में पूरे प्रकरण की जांच हो.

मामले को दबाने वाले अफसरों पर पोक्सो एक्ट की धारा 21 के तहत दर्ज हो केस

उन्होंने कहा कि जो भी पदाधिकारी मामले को दबाने में संलिप्त पाये जायें, उनके खिलाफ पोक्सो एक्ट की धारा 21 और अन्य आपराधिक धाराओं के तहत सख्त कार्रवाई की जाये.

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By Mithilesh Jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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