रांची से राणा प्रताप की रिपोर्ट
Ranchi News: रांची में मॉनिटर लिजार्ड की कथित अवैध तस्करी मामले में गिरफ्तार भाजपा नेता राजीव रंजन मिश्रा, उनके बेटे अविनाश रंजन मिश्रा और अरुण राम को अदालत से बड़ी राहत मिली है. एसीजेएम रवि नारायण की अदालत ने शुक्रवार को तीनों आरोपियों की जमानत याचिका मंजूर कर ली. कोर्ट के आदेश के बाद तीनों की रिहाई का रास्ता साफ हो गया है.
भाजपा प्रवक्ता रह चुके हैं चुन्नू मिश्रा
राजीव रंजन मिश्रा उर्फ चुन्नू मिश्रा भाजपा के पुराने नेताओं में गिने जाते हैं और पार्टी के प्रवक्ता के रूप में भी काम कर चुके हैं. वह भाजपा प्रदेश कार्यकारिणी के सदस्य भी रह चुके हैं. इस मामले में उनकी गिरफ्तारी के बाद राजनीतिक हलकों में काफी हलचल देखने को मिली थी.
14 मई को हुई थी गिरफ्तारी
वन विभाग की टीम ने 14 मई को रांची के डेली मार्केट थाना क्षेत्र स्थित नटराज होटल में छापेमारी की थी. इसी कार्रवाई के दौरान राजीव रंजन मिश्रा, उनके बेटे अविनाश रंजन और अरुण राम को गिरफ्तार किया गया था. वन विभाग ने आरोप लगाया था कि मॉनिटर लिजार्ड की अवैध तस्करी से जुड़े मामले में तीनों की संलिप्तता सामने आई है. गिरफ्तारी के बाद तीनों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया था. इसके बाद उनके अधिवक्ताओं ने अदालत में जमानत याचिका दाखिल की थी. शुक्रवार को मामले की सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष और अभियोजन पक्ष की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने तीनों को जमानत देने का फैसला सुनाया.
राजनीतिक गलियारों में मचा था हड़कंप
भाजपा नेता की गिरफ्तारी के बाद यह मामला राजनीतिक रूप से भी काफी चर्चा में रहा. राजीव रंजन मिश्रा के समर्थन में कई धार्मिक और सामाजिक संगठन खुलकर सामने आए थे. इतना ही नहीं, विपक्षी दल कांग्रेस के कुछ नेताओं ने भी इस कार्रवाई पर सवाल उठाए थे. पूर्व केंद्रीय मंत्री सुबोध कांत सहाय ने इस मामले में राजीव रंजन मिश्रा को फंसाए जाने का आरोप लगाया था. कांग्रेस नेता राजीव रंजन प्रसाद और आलोक दुबे ने भी उन्हें निर्दोष बताते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की थी. कांग्रेस नेताओं के समर्थन में आने के बाद यह मामला और अधिक राजनीतिक रंग लेने लगा था.
भाजपा नेताओं ने भी जताया विरोध
कांग्रेस नेताओं के बयान के बाद भाजपा ने भी इस मामले को गंभीरता से लिया. भाजपा प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू ने गिरफ्तारी को लेकर सवाल उठाए थे. इसके बाद भाजपा विधायक दल के नेता बाबूलाल मरांडी ने भी राजीव रंजन मिश्रा के परिवार से मुलाकात की थी. बाबूलाल मरांडी ने परिवार को न्याय दिलाने का भरोसा दिया था और कहा था कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए. उन्होंने यह भी कहा था कि बिना पूरी जांच के किसी को अपराधी घोषित करना उचित नहीं है. राजनीतिक जानकारों का मानना है कि भाजपा और कांग्रेस नेताओं का एक साथ किसी आरोपी के समर्थन में आना इस मामले को अलग पहचान दे रहा है. यही वजह है कि यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं बल्कि राजनीतिक चर्चा का विषय भी बन गया.
जेवीएम से भी लड़ चुके हैं चुनाव
राजीव रंजन मिश्रा का राजनीतिक सफर लंबा रहा है. भाजपा में सक्रिय भूमिका निभाने से पहले वह बाबूलाल मरांडी की पार्टी झारखंड विकास मोर्चा (जेवीएम) से भी चुनाव लड़ चुके हैं. रांची और आसपास के इलाकों में उनकी राजनीतिक पहचान मजबूत मानी जाती है. उनकी गिरफ्तारी के बाद समर्थकों ने लगातार यह दावा किया कि उन्हें साजिश के तहत फंसाया गया है. वहीं वन विभाग का कहना है कि मामले की जांच साक्ष्यों के आधार पर की जा रही है और कानून के अनुसार कार्रवाई की गई है.
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आगे भी जारी रहेगी कानूनी प्रक्रिया
हालांकि अदालत से जमानत मिलने के बाद तीनों आरोपियों को राहत जरूर मिली है, लेकिन मामले की कानूनी प्रक्रिया अभी जारी रहेगी. वन विभाग की जांच और अदालत में सुनवाई के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी. फिलहाल इस हाई प्रोफाइल मामले में जमानत मिलने के बाद राजनीतिक और सामाजिक हलकों में चर्चाएं तेज हो गई हैं. अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि जांच में आगे क्या तथ्य सामने आते हैं.
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