रांची. डीएसपीएमयू रांची के जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग में वीर बुधु भगत की जयंती मनायी गयी. कुलपति डॉ तपन कुमार शांडिल्य ने कहा कि भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में प्राणों की आहुति देनेवाले वीर शहीदों में कुछ एक नाम भारतीय इतिहास के स्वर्णाक्षरों में अंकित हो गए हैं, ऐसे ही एक नाम छोटानागपुर के वीर शहीद बुधू भगत का है. हालांकि, उनके त्याग और बलिदान को इतिहासकारों ने उसी प्रकार उपेक्षित रखा. वीर शहीद बुधु भगत छोटानागपुर के उन जनमत संग्रह के नायक थे, जिन्हें अंग्रेजों ने कोल विद्रोह की संज्ञा दी थी. यह लगभग उसी तरह है, जैसे 1857 की स्वतंत्रता संग्राम को क्रांतिकारी विद्रोह की संज्ञा दी गयी है. कुलपति ने कहा कि यह हमारा दायित्व और कर्तव्य है कि वीर बुधु भगत जैसे महापुरुषों की जीवनी को अधिक से अधिक पाठ्यपुस्तकों में शामिल किया जाए. डॉ जिंदर सिंह मुंडा और साहित्यकार महादेव टोप्पो ने भी विचार रखे. एक पुस्तक का भी विमोचन किया गया. यह जानकारी विवि के पीआरओ डॉ राजेश कुमार सिंह ने दी.
धुर्वा में वीर बुधु भगत की जयंती मनायी गयी
झारखंड आदिवासी सरना विकास समिति धुर्वा के तत्वावधान में धुमकुड़िया भवन परिसर में वीर बुधु भगत की 233वीं जयंती मनायी गयी. मुख्य वक्ता क्षेत्रीय संयोजक संदीप उरांव और सोमा उरांव थे. वक्ताओं ने कहा कि वीर बुधु भगत जैसे महान वीर स्वतंत्रता सेनानी का हमलोग जन्मदिन मना रहे हैं. उन्होंने अपने देश, समाज, धर्म के लिए प्राण की आहुति दी. कार्यक्रम में मेघा उरांव, हिंदूवा उरांव, अंजलि लकड़ा, पिंकी खोया, रवि प्रकाश उरांव, प्रदीप टोप्पो, शनि उरांव, साजन मुंडा, राजू उरांव, लोरया उरांव, जय मंत्री उरांव आदि शामिल हुए.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
