रांची. राज्य के विभिन्न जिलों में इन दिनों साइबर अपराध को लेकर जो बड़े फ्रॉड हो रहे हैं, उसमें सबसे प्रमुख डिजिटल अरेस्ट का मामला है. निवेश के नाम पर अधिक मुनाफा, कस्टम अधिकारी के नाम पर फोन और घर बैठे- बैठे काम की योजना से भी साइबर फ्रॉड को अंजाम दिया जा रहा है. राज्य के विभिन्न जिलों में दर्ज केस में साइबर अपराधियों के प्रमुख ट्रेंड उभरकर सामने आये हैं. जिसके बारे में जान कर आम लोग साइबर फ्रॉड से सुरक्षित रह सकते हैं.
अपराधी ट्राई के नाम पर करते हैं फोन
ट्राई द्वारा कभी किसी को फोन नहीं किया जाता है और न ही मोबाइल नंबर बंद किया जाता है. लेकिन साइबर अपराधी ट्राई के नाम पर फोन कर मोबाइल नंबर को गैर कानूनी गतिविधियों में इस्तेमाल की बात बताकर अपने झांसे में लेकर ठगी करते हैं. कस्टम में पार्सल पकड़े जाने के नाम पर जब कभी फोन आता है. तब यह समझें कि यह साइबर अपराधियों का फोन है. फोन आने पर तत्काल इसे काट दें और मोबाइल नंबर के बारे रिपोर्ट करें. पुलिस या सेंट्रल एजेंसी के अधिकारी कभी भी किसी गैर कानूनी गतिविधि को लेकर डिजिटल अरेस्ट नहीं करते हैं. इसलिए जब ऐसा मामला सामने आये, तो इस बात को लेकर सावधान रहें कि यह साइबर अपराधियों का एक ट्रैप है.
पुलिस नहीं करती डिजिटल अरेस्ट
पुलिस अधिकारी या सेंट्रल एजेंसी के अधिकारी किसी के परिवार के सदस्य को भी डिजिटल अरेस्ट नहीं करते हैं. परिवार के किसी सदस्य के पकड़े जाने की सूचना मिलने पर साइबर अपराधियों के जाल में फंसने से बचने के लिए इसका सत्यापन कर लें.
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