Ranchi news : राज्य के नाै नगर निगम को दो वर्गों में बांटने के मामले में सरकार व राज्य निर्वाचन आयोग से मांगा जवाब
मामले की अगली सुनवाई 17 दिसंबर को होगी
रांची. झारखंड हाइकोर्ट ने नगर निकाय चुनाव में राज्य के नाै नगर निगमों को दो श्रेणियों (क और ख) में बांटने को चुनाैती देनेवाली याचिका पर सुनवाई की. चीफ जस्टिस तरलोक सिंह चाैहान व जस्टिस राजेश शंकर की खंडपीठ ने सुनवाई की. पक्ष सुनने के बाद खंडपीठ ने राज्य सरकार व राज्य निर्वाचन आयोग को मामले में जवाब दायर करने का निर्देश दिया. साथ ही मामले की अगली सुनवाई के लिए खंडपीठ ने 17 दिसंबर की तिथि निर्धारित की. इससे पूर्व प्रार्थी की ओर से अधिवक्ता विनोद सिंह ने खंडपीठ को बताया कि राज्य में धनबाद सहित नाै नगर निगम संचालित हैं. राज्य सरकार ने इन्हें दो वर्गों में बांट दिया है. एक वर्ग में रांची व धनबाद नगर निगम तथा दूसरे वर्ग में सात नगर निगम को रखा गया है. सरकार की यह नीति असंवैधानिक है. कहा कि नगर निकाय चुनाव वर्ष 2011 की जनगणना के आधार पर कराया जाना है. धनबाद में वर्ष 2011 की जनसंख्या के अनुसार लगभग दो लाख अनुसूचित जाति के लोग निवास करते हैं, वहां मेयर का पद अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित होना चाहिए, लेकिन सरकार की इस नीति के तहत धनबाद में मेयर का पद अनारक्षित हो जायेगा. वहीं गिरिडीह में अनुसूचित जाति की जनसंख्या लगभग 30,000 है, लेकिन वहां मेयर का पद अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित कर दिया जायेगा. सरकार की यह नीति संविधान की भावना के खिलाफ है. उन्होंने इसे निरस्त करने का आग्रह किया. मामले की सुनवाई के दाैरान राज्य निर्वाचन आयोग की ओर से अधिवक्ता सुमित गाड़ोदिया ने पैरवी की. उल्लेखनीय है कि प्रार्थी शांतनु कुमार चंद्र उर्फ बबलू कुमार ने याचिका दायर की है. उन्होंने राज्य के नगर निगमों को दो वर्गों में बांटने का विरोध किया है.
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