रांची से प्रणव की रिपोर्ट
Naxalite Surrender: तेलंगाना में आत्मसमर्पण करने वाले दो बड़े नक्सलियों का झारखंड से गहरा संबंध सामने आया है. पुलिस सूत्रों के अनुसार दोनों लंबे समय तक पश्चिमी सिंहभूम जिले के चाईबासा और आसपास के इलाकों में सक्रिय रहे थे. इनका नेटवर्क सारंडा और कोल्हान क्षेत्र तक फैला हुआ था.
चाईबासा में फैला रखा था नेटवर्क
आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों में विश्वनाथ उर्फ संतोष उर्फ सिलाय उर्फ डोंगा उर्फ गंगाधर उर्फ नरसन्ना का नाम शामिल है. वह आंध्र प्रदेश के पूर्वी गोदावरी जिले का रहने वाला बताया गया है. नक्सली संगठन में वह स्पेशल एरिया कमेटी का सदस्य था और चाईबासा क्षेत्र में सक्रिय रहकर संगठन को मजबूत करने का काम करता था. दूसरी नक्सली पूनम उर्फ जोभा उर्फ भवानी उर्फ सुजाता है. उसका भी संबंध आंध्र प्रदेश के पूर्वी गोदावरी जिले से बताया गया है. पुलिस के अनुसार वह रीजनल कमेटी स्तर पर सक्रिय थी और चाईबासा तथा सारंडा क्षेत्र में संगठनात्मक गतिविधियों में शामिल रही.
जंगल क्षेत्रों में बनायी थी पकड़
पुलिस अधिकारियों के मुताबिक दोनों नक्सलियों ने लंबे समय तक जंगल और सीमावर्ती इलाकों में नेटवर्क तैयार किया था. ग्रामीणों के बीच संपर्क बढ़ाकर संगठन के लिए सूचना तंत्र मजबूत करने का प्रयास किया गया. सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि चाईबासा और सारंडा के दुर्गम जंगलों का इस्तेमाल नक्सली संगठन सुरक्षित ठिकाने के रूप में करता था. यहां से झारखंड, ओडिशा और छत्तीसगढ़ के सीमावर्ती इलाकों में गतिविधियां संचालित की जाती थीं.
इसे भी पढ़ें: एसपी का दावा: गुमला हुआ नक्सलमुक्त, 5 लाख के इनामी नक्सली ने किया सरेंडर
आत्मसमर्पण को पुलिस ने बताया बड़ी सफलता
तेलंगाना में दोनों नक्सलियों के आत्मसमर्पण को सुरक्षा एजेंसियां बड़ी सफलता मान रही हैं. लगातार सुरक्षा अभियान, दबाव और सरकार की पुनर्वास नीति के कारण नक्सली संगठन कमजोर पड़ते जा रहे हैं. पुलिस अधिकारियों का कहना है कि आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों को सरकार की पुनर्वास योजना का लाभ दिया जाएगा ताकि वे सामान्य जीवन की ओर लौट सकें.
इसे भी पढ़ें: नौकरी के नाम ठगी मामले पर बोले बीसीसीएल सीएमडी – बख्शे नहीं जाएंगे संलिप्त कर्मचारी
