रांची एयरपोर्ट पर बिना ‘फिजिकल टच’ के एसएम स्कैनर के जरिये पूरी की जा रही है जांच प्रक्रिया

रांची : दो महीने के बाद आज सुबह 9.50 बजे दिल्ली से आया इंडिगो का विमान रांची एयरपोर्ट पर उतरा और फिर वहीं प्लेन दिल्ली एयरपोर्ट के लिए रवाना भी हुआ. उसके बाद बंगलौर से एयरएशिया का विमान रांची एयरपोर्ट पर उतरा और रवाना भी हुआ. यह जानकारी रांची एयरपोर्ट आॅथिरिटी की ओर से विनोद शर्मा ने दी.

रांची : दो महीने के बाद आज सुबह 9.50 बजे दिल्ली से आया इंडिगो का विमान रांची एयरपोर्ट पर उतरा और फिर वहीं प्लेन दिल्ली एयरपोर्ट के लिए रवाना भी हुआ. उसके बाद बंगलौर से एयरएशिया का विमान रांची एयरपोर्ट पर उतरा और रवाना भी हुआ. यह जानकारी रांची एयरपोर्ट आॅथिरिटी की ओर से विनोद शर्मा ने दी.

उन्होंने बताया कि नागर विमानन मंत्रालय द्वारा जो भी गाइडलाइन दी गयी है, रांची एयरपोर्ट पर उसका अक्षरश: पालन हो रहा है. उन्होंने बताया कि हमने यात्रियों को दो घंटे पहले एयरपोर्ट बुलाया है. उनसे बोर्डिंग पास लेकर आने को कहा गया है, जो नहीं लाते हैं हम उन्हें उपलब्ध करा रहे हैं. एक ही बैग ले जाने की अनुमति है. उनके सामान को पहले सेनेटाइज किया जा रहा है. उसके बाद यात्रियों की थर्मल स्कैनिंग हो रही है. फिर यात्री अपना हाथ सेनेटाइज करते हैं. वेबकैम से अपना आईडी कार्ड स्कैन कराते हैं. एयरपोर्ट पर ट्राली मना है, लेकिन अगर कोई दिव्यांग है या कोई वृद्ध व्यक्ति या महिला जो अपना सामान नहीं उठा पा रहे हैं. उन्हें ट्राॅली दिया जा रहा है. सबसे जरूरी बात यह है कि सिक्यूरिटी जांच के दौरान भी यात्रियों के शरीर को छुआ नहीं जा रहा है. हम उनके बाॅडी को एसएम स्कैनर के जरिये स्कैन कर लेते हैं. यह एहतियात कोरोना संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए किया जा रहा है.

उन्होंने बताया कि दोपहर 3.30 बजे हैदराबाद से प्लेन रांची आने वाली है, जो वापस भी जायेगी. इसके बाद आज शाम 7.15 बजे एक प्लेन दिल्ली के लिए रवाना होगी. यह दोनों ही प्लेन इडिगो की है. हालांकि विनोद शर्मा ने यह नहीं बताया कि उड़ान ने दौरान क्रू मेंबर किस तरह की सावधानी बरत रहे हैं. उन्होंने कहा कि यह एयरलाइंस वाले बता पायेंगे कि एयरहोस्टेस प्लेन में किस तरह का एहतियात बरत रही हैं. गौरतलब है कि सरकार ने एयरहोस्टेस के लिए पीपीई किट पहनना अनिवार्य किया है. साथ ही उनकी भी स्कैनिंग की जायेगी.

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Published by: Rajneesh anand

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हैं और पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव रखती हैं.फिलहाल वे प्रभात खबर के ओरिजिनल, नेशनल, इंटरनेशनल और खेल कैटेगरी के लिए राइटिंग का काम करती हैं. उनकी पहचान फैक्ट बेस्ट रिपोर्टिंग, रिसर्च बेस्ड स्टोरी और एक्सप्लेनर लेखन के लिए है.

राजनीति, सामाजिक सरोकार, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों पर उनकी विशेष रुचि रही है. वैसे मुद्दे जो समाज के हाशिये पर मौजूद समुदायों और आम लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की बहस में अपेक्षाकृत कम जगह पाते हैं, ऐसे विषयों पर भी लेखन में रुचि रखती हैं.

रजनीश आनंद कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर अध्ययन एवं रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर काम किया. इसके अलावा सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की है.

आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है.हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों से जुड़ी चुनौतियों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं.

रजनीश आनंद झारखंड की राजधानी रांची में रहती हैं और इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक हैं. उन्होंने वर्ष 2000 में पत्रकारिता की शुरुआत झारखंड जागरण दैनिक से की. इसके बाद प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस और दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और स्वतंत्र लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य प्रकाशनों में काम करने के साथ-साथ वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं.

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