Jharkhand News: सेंगेल अभियान ने की मांग- आदिवासी महिलाओं को सभी मामलों में मिले 50 फीसदी आरक्षण

आदिवासी सेंगेल अभियान द्वारा धुमकुड़िया सभागार, करम टोली चौक में आदिवासी बचाओ विचार सम्मेलन का आयोजन किया गया. इसमें प्रस्ताव पारित किया गया कि आदिवासी महिलाओं को मान-सम्मान, अधिकार दिया जाये.

आदिवासी सेंगेल अभियान द्वारा धुमकुड़िया सभागार, करम टोली चौक में आदिवासी बचाओ विचार सम्मेलन का आयोजन किया गया. इसमें प्रस्ताव पारित किया गया कि आदिवासी महिलाओं को मान-सम्मान, अधिकार दिया जाये. सभी मामलों में उन्हें 50 फीसदी आरक्षण दिया जाये. जब तक आदिवासियों की हासा, भाषा, जाति, धर्म, इज्जत, आबादी, रोजगार, चास-बास, संवैधानिक अधिकारों की रक्षा नहीं होगी, तब तक आदिवासियों को नहीं बचाया जा सकता.

इसके लिए सभी संगठनों को मिल कर काम करने और बोलने की आवश्यकता है. कुड़मियों की एसटी बनाने की अनुशंसा करनेवाले सांसदों, विधायकों और राजनीतिक दलों को निशाने पर लिया जायेगा, क्योंकि ऐसा होना आदिवासियों के लिए फांसी का फंदा बन जायेगा. इसके लिए 30 अक्तूबर काे पांच राज्यों में उनका पुतला दहन किया जायेगा. 1932 के खतियान की बात मात्र झुनझुना है. यह लागू नहीं होने वाला.

इसलिए जब विषय रोजगार का है, तो इसका वैकल्पिक समाधान यह है कि राज्य की 90 फीसदी सरकारी नौकरियां ग्रामीण क्षेत्रों को और 10 प्रतिशत शहरी क्षेत्रों को दी जायें. ये नौकरियां प्रखंडवार हों और प्रखंड के अभ्यर्थियों से ही भरी जायें. आदिवासियों की दो लाख बैकलॉग रिक्तियां भी अविलंब भरी जायें. आदिवासियों को एक अलग धर्म कोड दिया जाना उनका मौलिक अधिकार है. यह सरना धर्म कोड, आदिवासी धर्म कोड या किसी भी नाम से हो सकता है. प्रकृति पूजक आदिवासियों के अलग धर्म कोड के लिए आंदोलन करने वालों के बीच समन्वय बनाया जाये.

सम्मेलन को सालखन मुर्मू, पूर्व मंत्री गीताश्री उरांव, आदिवासी छात्र संघ के केंद्रीय अध्यक्ष सुशील उरांव, संगीता टोप्पो, रंजीत बाउरी, सूरज मुंडा, कुंदरसी मुंडा, अधिवक्ता मीनाक्षी महली, जय आदिवासी केंद्रीय परिषद की निरंजना हेरेंज टोप्पो, रजनी मुर्मू, पंचम लोहरा, आशाराम मुंडा, वासुदेव भगत ने संबोधित किया.

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By Prabhat khabar news desk

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